
♦लोकल ऑथिरिटी की बैठक बुलाने को लेकर मेयर ने डीसी को लिखा था पत्र.
♦आशा लकड़ा ने कहा, डीसी के कार्यशैली से पता चलता है कि वे मेयर पद को सम्मान नहीं देते हैं.
Ranchi : मेयर आशा लकड़ा ने डीसी राय महिमापत रे पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में निहित शक्तियों के दुरूप्रयोग करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत लोकल अथॉरिटी की बैठक बुलाने के लिए उन्होंने रांची डीसी को करीब 4 बार पत्र लिखा. जब जवाब नहीं मिला, तो अपने अंतिम पत्र में बैठक नहीं बुलाने सहित छह बिंदुओं पर डीसी से 48 घंटे में मेयर ने जवाब मांगा था. लेकिन डीसी महिमापत रे की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया.
डीसी की कार्यशैली से स्पष्ट होता है कि वे मेयर पद को तनिक भी सम्मान नहीं देते हैं. अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, राजधानी के विकास काम में डीसी के गतिरोध को देख उन्होंने अपने वकील के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.
बता दें कि मेयर आशा लकड़ा ने अभी कुछ दिन पहले सूडा के निकाले टेंडर को लेकर भी हाईकोर्ट की शरण ली है. टेंडर होल्डिंग टैक्स वसूली के लिए कंपनी के चयन को लेकर है.
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राजधानी को सील मुक्त करने से पहले मेयर से नहीं ली कोई सलाह
मेयर ने कहा कि पूरा राज्य और राजधानी इन दिनों कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है. फिर भी रांची डीसी ने रांची शहर को कंटेनमेंट जोन मुक्त कर दिया, जो कि काफी दुखद है. सील मुक्त करने से पहले डीसी ने न तो आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत गठित कमिटी की बैठक की, न ही मेयर को इसकी कोई जानकारी दी.
आशा लकड़ा का कहना है कि मेयर होने के नाते वह आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत गठित समिति की सह-अध्यक्ष हैं. अपने वकील से भी उन्होंने इसकी जानकारी ली है.आशा लकड़ा का कहना है कि उनके पत्रों का जवाब डीसी राय महिमापत रे किसके इशारे पर नहीं दे रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है.
शहरी निकाय के जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं डीसी
मेयर ने कहा कि निगम राजधानी के विकास और सौंदर्यीकरण के कामों के लिए लगातार प्रयासरत हैं. हालांकि संक्रमण को लेकर परिस्थितियां काफी बदली हैं. फिर भी निगमकर्मी अपने जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं. कोरोना संक्रमण को देख लोकल अथॉरिटी की बैठक बुलाने की बात जब भी उन्होंने डीसी से की, तो वे उन्हें बरगलाते रहे हैं.
ऐसा कर डीसी शहरी निकाय के जनप्रतिनिधि के अधिकारों का हनन कर रहे हैं. आशा लकड़ा ने कहा कि वे संवैधानिक रूप से होने वाले किसी भी अभियान में डीसी उन्हें शामिल नहीं करना चाहते हैं. पत्रों का कोई जवाब नहीं देकर उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादा का हनन किया है.
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