Opinion

जब तक सत्ता मोह में नेता संरक्षण देते रहेंगे, तब तक विकास दुबे जैसा गुंडा पैदा लेता रहेगा

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Bijay Jha
कोई एक दिन में विकास दुबे नहीं बन जाता. भ्रष्ट राजनीति और भ्रष्ट पुलिसकर्मी का जब गठजोड़ हो जाता है, तब उसकी कोख से विकास दुबे जैसे लोग समाज में पैदा होते हैं. इसलिए विकास दुबे जैसे लोगों के पैदा होने का श्रेय भी इन्हीं दोनों को मिलना चाहिए.

विकास दुबे बसपा, सपा और भाजपा सभी का समयानुसार फायदा लेता रहा और सभी को फायदा पहुंचाता रहा. विकास दुबे पर 60 केस थे, तब भी सभी राजनीतिक दलों का वो दुलारा था.
सभी को पता था कानपूर के 400 कारखानों से प्रतिमाह उसके नाम पर रंगदारी की उगाही हो रही थी. Real Estate का काम करने वाले सभी लोग उसके आतंक से तबाह थे. जिस जमीन पर नजर गड़ी वो जमीन समझो अब उसकी ही हो गयी.

क्या कानपुर का Intelligence Department / C.I. D. Department / Police Department / District Administration को विकास दुबे के आपराधिक कारगुजारियों की बिल्कुल ही जानकारी नहीं थी. अगर ऐसा है तब तो और भी भयावह स्थिति है. देश के सबसे बड़े सूबे के औद्योगिक जिले की अगर ऐसी स्थिति है, तब पूरे देश में ऐसे भ्रष्ट गठजोड़ के कारण न जाने कितने डॉन और माफिया पल रहे हैं. तब यह सवाल पूछ्ना वाजिब है कि आज कि राजनीति किसकी हितैसी है. आम आदमी कि या गुंडा, दबंग या फिर माफिया की.

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विकास दुबे के खिलाफ पूरी सरकार को जगाने के लिए एक DSP सहित 8 पुलिसकर्मी को अपनी जान कुर्बान करनी पड़ती है. तब सरकार को अपनी जिम्मेवारी का एहसास होता है. अभी और न जाने कितने विकास दुबे भ्रष्ट राजनीति और भ्रष्ट पुलिस प्रशासन के साये में पल रहे हैं.

क्या राज्य सरकार अब भी कोई सीमा रेखा तय करेगी कि कितने आपराधिक केस होने पर किसी को भी जिला बदर-तड़ीपार – CCA लगा कर समाज को सुरक्षित रखने का काम किया जायेगा. जब तक राजनीतिक दल सत्ता मोह में ऐसे लोगों को अपनाते रहेंगे, नेता अपने स्वार्थवश संरक्षण देते रहेंगे, तब तक विकास दुबे जैसे लोग समाज में पैदा लेते रहेंगे.

डिस्क्लेमरः यह लेखक के निजी विचार हैं.

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