
Dhalbhumgadh : गुड़ाबंदा और धालभूमगढ़ कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालय के कई अभिभावकों को अपने बच्चों से समय पर मिलने नहीं दिया जाता है. रविवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ. करीब चार घंटें तक बच्चों से मिलने की आस में वे बैठे हुए थे. जब देखा कि उनकी नहीं सुनी जा रही है तो सभी ने मिलकर हंगामा करना शुरू कर दिया. अभिभावक महोलीशोल स्थित केजीबीवी अपने बच्चों से मिले पहुंचे थे.
अभिभावकों की नहीं लेते हैं सुधि
इसकी सूचना मिलने पर विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य इंद्रो मुर्मू पहुंचे एवं अभिभावकों से जानकारी ली. विद्यालय पहुंचे लगभग 50 अभिभावकों ने गुड़ाबंधा प्रखंड क्षेत्र के अभिभावक शामिल थे. हालांकि विरोध को देखते हुए लगभग तीन घंटे के बाद अभिभावक अपने बच्ची से मिले. धालभूमगढ़ एवं गुड़ाबंधा के अभिभावक विजेश हांसदा, सपन सामंद, शेफाली सीट, लखी गोप, भागमत हेम्ब्रम, गुरू चरण धारा, विसंभर नायक, सांवला मांड़ी सहित अन्य अभिभावक सुबह 8 बजे पहुंचे क्योंकि रविवार को ही बच्चों से अभिभावकों से मिलने देते हैं. उस दिन अपने बच्चों के लिए भोजन आदि बनाकर लाते हैं.
क्यों करते हैं पक्षपात
बाद में जब इसकी जानकारी मिली तो विद्यालय पहुंची कस्तुरबा गांधी बालिका विद्यालय की जिला प्रभारी बिंदू झा अभिभावकों से जानकारी ली. समिति के सदस्य इंद्रो मुर्मू ने जिला प्रभारी को जानकारी देते हुए बताया कि यह सभी अपके विद्यालय के छात्रों का अभिभावक है. उन्हें वार्डेन द्वारा अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया गया. बिंदु झा ने कहा कि सभी अभिभावक को विद्यालय की ओर से एक कार्ड दिया गया है. उस कार्ड के पीछे लिखा है कि धालभूमगढ़ के लिए प्रत्येक माह के पहले रविवार को भेंट कर सकते हैं.
क्यों रखा जाता है अभिभावकों से दूर
गुड़ाबंदा के अभिभावक माह के अंतिम रविवार को आकर भेंट करेंगे. इसकी जानकारी वार्डेन की ओर से अभिभावकों को बैठक के दौरान दी गई थी. कोराना के कारण पिछले दो वर्ष में सरकारी गाइड लाइन में परिवर्तन किया गया है. हालांकि रविवार को दिन है बच्चे आराम से उठकर तैयार होने में देरी होती है. अभिभावक इस बात से निश्चित रहें कि बच्चों को उनके अभिभावक से दूर रखा जाता है.
एसएमसी सदस्यों ने कहा खुद पहल करेंगे
एसएमसी सदस्यों से कहा कि बैठक में स्वयं उपस्थित रहकर सभी विषय पर चर्चा कर समाधान करेंगे. वार्डेन चंपा बेसरा का कहना था कि हालांकि इस रविवार को बच्चों से मिलने का समय नही था इसके बावजूद कुछ देर बाद बच्चों से अभिभावक को मिलने दिया गया. कोई भी बच्चा बीमार होता है तो अभिभावक को इसकी जानकारी फौरन दी जाती है.
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