
Chakradharpur : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में मां दुर्गा की शक्तिपीठ के रूप में सुप्रसिद्ध चक्रधरपुर के 400 वर्ष पुराने ऐतिहासिक मां भगवती केरा देवी राज्य के सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में जल्द विकसित होगा. चक्रधरपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर केरा गांव में ब्राह्मणी नदी के किनारे स्थित माता के इस मंदिर में झारखंड के अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल आदि दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु माता की पूजा के लिए आते हैं. राज्य सरकार के पर्यटन विभाग के निर्देश पर चक्रधरपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार सिंन्हा ने मंदिर पहुंच कर केरा मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों से मिलकर मंदिर क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए किये जाने वाले कार्यों के बारे में चर्चा की.
प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा मां भगवती केरा मंदिर को राज्य के सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है. केरा राजपरिवार के सदस्य और मां भगवती केरा मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि ऐतिहासिक केरा मंदिर में पर्यटन की सुविधाएं विकसित होने पर राज्य और देश के पर्यटन के मानचित्र पर इस मंदिर की प्रसिद्धि और बढ़ेगी.
मंदिर का होगा र्जीणोद्धार, मंडप, विश्रामगृह समेत होगा यात्री शेड व दुकान का निर्माण
ऐतिहासिक मां भगवती केरा देवी मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार के साथ ही विवाह मंडप, विश्रामगृह, यात्री शेड, दुकान, स्नानगृह, सामुदायिक भवन, सामुदायिक शौचालय, सड़क, स्वच्छ पेयजल, रसोई घर आदि का निर्माण किया जाएगा. प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कुमार सिन्हा ने केरा मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों को दो दिनों के अंदर प्रस्ताव देने के लिए कहा है ताकि जल्द से जल्द कार्य आरंभ हो सके.
केरा राज परिवार के सदस्यों ने कही ये बात
केरा राज परिवार के सदस्य दीपक सिंहदेव ने कहा कि मां भगवती केरा मंदिर का इतिहास चार सौ साल पुराना है. यहां राज्य से नहीं, बल्कि राज्य के बाहर एवं विदेश से भी लोग मां का दर्शन करने के लिए पहुंचते है. वैसे श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ-साथ पूरा विकास होना चाहिए. उन्होंने कहा कि केरा मंदिर को राज्य के सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थल में बदलने का सरकार का फैसला सराहनीय है.




