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लॉकडाउन, छात्र व मजदूरः समय पर जरुरी कदम नहीं उठाये गये, तो अराजकता फैलने का खतरा

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Surjit Singh

28 मार्च की चार घटनाएं:-

–    गुजरात के सूरत में घर भेजने की मांग कर रहे सैंकड़ों मजदूर सड़क पर उतर आये. कंपनी दफ्तर व वहां खड़ी कारों में तोड़ फोड़ की. मजदूरों की शिकायत थी कि उन्हें भोजन भी ठीक से नहीं मिल रहा.

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–    हरियाणा के अंबाला में कोरोना संदिग्ध महिला की मौत के बाद अंत्योष्टि करने श्मशान घाट पहुंची प्रशासन पर ग्रामीणों ने पथराव किया. 30 लोग गिरफ्तार किये गये हैं.

–    पश्चिम बंगाल के हावड़ा में 300 लोगों की भीड़ जमा हो गयी. उसे हटाने गयी तो पुलिस टीम पर लोगों ने हमला कर दिया. हिंसा पर काबू पाने के लिये रैफ के जवानों को बुलाना पड़ा.

–    राजस्थान के कोटा में झारखंड-बिहार के छात्र घर पहुंचाने की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं, सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं.

इसके अलावा कई राज्य जो शुरुआत में केंद्र के पर फैसले के साथ थे, वह अब नियमों में एकरुपता नहीं रहने के कारण केंद्र पर आरोप लगाने लगे हैं.

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दिल्ली, मुंबई, सूरत और देश के सभी हाईवे पर हुई पुरानी घटनाओं को छोड़ दीजिये. 28 अप्रैल की घटनाओं पर ही गौर करें, तो हालात के चिंताजनक होने की तरफ इशारा करते हैं. यह बताता है कि सिर्फ चार घंटे की नोटिस पर लगाया गया लॉकडाउन देश के बहुत बड़े तबके पर भारी पड़ रहा है. लोग परेशान हैं, डरे हुए हैं और गुस्से में हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो पुलिसिया सख्ती के बल पर इन्हें लंबे समय तक रोका जाना संभव नहीं हो पायेगा.

23 मार्च से देश में लॉकडाउन है. लॉकडाउन 3 मई तक रहेगा. लोग घरों में बंद हैं. छात्र विभिन्न शहरों में फंसे हुए हैं. राज्यों में मजदूरों के पास ना काम है ना भोजन. लोग डरे हुए हैं औऱ गुस्से में हैं. लॉकडाउन की वजह से बेरोजगार हुए लोगों के घरों में राशन खत्म होने लगा है. लॉकडाउन के 35 दिन बीतने के बाद भी हमारी सरकारें (केंद्र की या राज्यों की) इनके लिए जरुरी व बुनियादी जरुरतों को पूरा करने में विफल रही हैं.

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अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है कि यह हालात कभी भी अराजकता में बदल सकती है. इसलिए जरुरी है कि केंद्र व राज्यों की सरकारें तत्काल जरुरी कदम उठायें. घरों में बंद लोगों तक जरुरी सामान उपलब्ध कराया जाये.

कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के इलाज की व्यवस्था की जाये. इसके लिए चिकित्सकों, नर्स व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को जरुरी संसाधन उपलब्ध करायी जाये.

विभिन्न शहरों में फंसे छात्रों और मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए एक जैसा नियम बने. केंद्र इसकी अगुवाई करे और राज्यों की सरकार तय नियम का पालन. अगर यह नहीं होता है, तो गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं. घरों में बंद गरीब व जरुरतमंद लोग सड़क पर आ सकते हैं. दूसरे प्रदेशों व महानगरों में पढ़ने गये छात्र कायदे को तोड़ कर अपने घऱों तक पहुंचने के लिये निकल देंगे.

विभिन्न राज्यों में फंसे मदजूरों ने तो लॉकडाउन के दौरान ही कई घटनाएं करके इशारा भी कर दिया है. वह कभी भी तोड़-फोड़ व हिंसा फैलाने वाले भीड़ में तब्दील हो सकते हैं. तब देश के विभिन्न हिस्सों में अराजक माहौल बनने से कोई नहीं रोक पायेगा. इसलिए जरुरी है कि केंद्र व राज्यों की सरकारें समय रहते जरुरी कदम उठाये.

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