
- लॉकडाउन हटने के बाद व्यापार के साथ उत्पादन और मार्केट सबसे अधिक होगा प्रभावित
- जब तक 75 प्रतिशत काम न करें कारखानें, तब तक कोई विकल्प नहीं
Chhaya
Ranchi कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन अब लोगों के लिए लेकर लॉकडाउन के मद्देनजर इकोनॉमिक स्लोडाउन महत्वपूर्ण मुद्दा बन कर उभरा है. राज्य में भले ही लॉकडाउन बढ़ाने पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है. लेकिन अगर लॉकडाउन बढ़े या नहीं भी बढ़े तो राज्य को होने वाले नुकसान और बेरोजगारी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. राज्य में छोटे और मध्यम उद्योगों की संख्या सबसे अधिक है.
पूरे राज्य की ही मानें तो लगभग 45 हजार के आस पास छोटे और मध्यम उद्योग हैं. इनमें से कुछ ऐसे उद्योग भी हैं, जो काफी अच्छी स्थिति में हैं. लेकिन उन उद्योगों के सामने संकट की स्थिति है, जो छोटे है. एक अमूमन के मुताबिक, लॉकडाउन के बाद राज्य में पांच से दस प्रतिशत छोटे उद्योग बंद हो जायेंगे. राज्य के छोटे व्यापारियों की मानें तो कम लागत में चलने वाले उद्योग राज्य में लगभग बंद ही हो जायेंगे.
हालांकि ऐसे उद्योगों के कोई सटीक आंकड़े तो नहीं हैं. लेकिन बिना तैयारी किये लॉकडाउन लागू करने से ऐसी स्थिति उत्पन्न होगी. जिससे निकलना मुश्किल हो जायेगा. अगर एक महीने तक लॉकडाउन हुआ तो राज्य में लगभग 15000 करेाड़ का कारोबार प्रभावित होगा. जिसे न्यूज विंग में पहले ही प्रकाशित किया गया है.
इसे भी पढ़ें – UP पुलिस का ऐलान- #TabligiJamat में शामिल लोगों की जानकारी देने पर मिलेगा इनाम
75 प्रतिशत को वापस अपनी स्थिति में आने में लगेंगे तीन महीने
भले ही छोटे और मध्यम उद्योगों को वापस अपनी स्थिति में आने में डेढ़ से दो महीने का समय लगें. लेकिन 75 प्रतिशत काम शुरू करने के लिए उद्योगों को कम से कम तीन महीने का समय लगेगा. फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष दीपक कुमार मारू ने जानकारी दी कि उद्योग तो लॉकडाउन के बाद किसी तरह चलेंगे.
लेकिन 75 प्रतिशत जब तक कारखानें काम नहीं करने लगें, तब तक कुछ नहीं हो सकता. झारखंड में छोटे और मध्यम उद्योगों की संख्या अधिक है. लेकिन आर्थिक मंदी के बाद से हुए बदलाव का असर अब भी है. चेंबर के अनुमान के मुताबिक, राज्य में अगर लॉकडाउन बढ़ा, तो कम से कम 40 हजार लोग बेरोजगार हो सकते हैं. क्योंकि तब व्यापारी वर्ग भी इस स्थिति में नहीं रहेंगे कि कर्मचारियों को वेतन दे सकें या लॉकडाउन हटने के बाद काम में रख सकें.
इसे भी पढ़ें – #Covid19: केरल में 71 साल के बुजुर्ग की गयी जान, संक्रमण से राज्य में तीसरी मौत
उत्पादन और मार्केट में पड़ने वाला है असर
लॉकडाउन के बाद उत्पादन और मार्केट पर सबसे अधिक प्रभाव रहेगा. फिलहाल सिर्फ खाद्यान्न के कारखानें ही चल रहे हैं. लेकिन ये भी तब तक ही चल पायेंगे, जब तक वाहन की व्यवस्था होगी. मारू ने बताया की लॉकडाउन के बाद लोग सर्तक रहेंगे. कर्मचारी और मजदूर खुद भी सर्तक रहेंगे. हो सकता है कामगार न भी मिलें. हमें भी सर्तक रहना होगा. ऐसे में अभी जिन व्यापारियों के पास कच्चा माल है. वो तो पूरी तरह बर्बाद ही हो रहा है.
खाद्यान्न तो प्रभावित नहीं होगा, लेकिन आधारभूत संरचनाओं से जुड़े सभी काम प्रभावित हो जायेंगे. वहीं सरकार व्यापारियों से हर तरह की उम्मीद करती है. लेकिन बदले में हमें कुछ नहीं देती. अभी तक तो बिजली के फिक्सड चार्जेस में कमी नहीं की गयी है. कम से कम राज्य सरकार उद्योगों को राहत देने के लिए बिजली के फिक्सड चार्जेस में ही कमी कर दें.
लॉकडाउन के दौरान ही उठायें भावी कदम
पूर्व चेंबर अध्यक्ष दीपक कुमार मारू और वर्तमान अध्यक्ष कुणाल आजमानी ने बताया कि व्यापारियों की ओर से सरकार को पूरी सहायता की जा रही है. बदले में हमें भी उम्मीद है. सभी व्यापारी अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों को वेतन दे रहे हैं.
लेकिन सरकार भी तो कोई पहल करें. लॉकडाउन के दौरान ही सरकार अगर भावी कदम नहीं उठाती है तो आने वाला समय भयावह होगा. राज्य की अर्थव्यवस्था पूरी तरह अस्थिर हो जायेंगी. जिसके दूरगामी परिणाम होंगे. सरकार से उम्मीद करते हुए एक साल तक लाइसेंस कॉस्ट में कमी करने, बिजली की फिकस्ड चार्जेस में चार माह तक कमी करने, ट्रांसपोर्टेशन आदि में सहयोग समेत अन्य मांग की गयी.
इसे भी पढ़ें – #Jharkhand में कोरोना से मरने वाले बुजुर्ग का तबलीगी कनेक्शनः बांग्लादेश और दिल्ली से लौटे जमातियों से की थी मुलाकात




