
Ranchi: राज्य के सुदूर क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिये उर्जा संचरण निगम लगातार प्रयासरत है. पिछले कुछ सालों से निगम की ओर से सुदूर इलाकों में ट्रांसमिशन लाइन और पावर सब स्टेशन निर्माण पर बल दिया जा रहा है. जिससे राज्य के सुदूर इलाकों में बिजली की समस्या कम हो. वहीं, डीवीसी से निर्भरता कम करना भी निगम का लक्ष्य है. निगम की मानें तो राज्य के अलग अलग हिस्सों में इन दिनों ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया जा रहा है, विशेषकर डीवीसी क्षेत्र में.
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इसी क्रम में आने वाले समय में रामगढ़ और हजारीबाग में भी ट्रांसमिशन लाइन बनने की तैयारी की जा रही है. इस लाइन से पतरातु और जैनामोड़ को जोड़ा जायेगा. जिससे क्षेत्र की बिजली की समस्या कम हो. वहीं, पतरातु में बन रहे एनटीपीसी पावर स्टेशन से राज्य के अन्य हिस्सों में बिजली मिल सकें. इस लाइन के निमार्ण से भविष्य की बिजली की समस्या कम हो सकती है. फिलहाल, निगम की ओर से रामगढ़ और हजारीबाग जिला में प्रशासन से जमीन की मांग की गयी. इसके लिये निगम को दस एकड़ जमीन की जरूरत है. जमीन की समस्या का हल होते निगम इस पर कार्य करेगा.
अगले महीने तक धनबाद और बोकारो का काम पूरा होगा
उर्जा संचरण निगम की ओर से जल्द धनबाद और बोकारो में भी ग्रिड और ट्रांसमिशन लाइन शुरू कर दिया जायेगा. निगम की मानें तो नवंबर के अंत तक धनबाद और बोकारो में संचरण लाइन से संबधित काम पूरा कर लिया जायेगा. जिससे क्षेत्र में डीवीसी निर्भरता कम हो जायेगी. वहीं, पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिला में भी 45 संचरण टावर लगाये गये है. इसके लिये पश्चिम बंगाल से ग्रिड टावर के लिये अनुमति मिली. फिलहाल, रेलवे से मेगा ब्लॉक मिलने पर काम पूरा हो जायेगा. जिसके बाद चंदनकियारी ग्रिड चालू होने के बाद इसे जैनामोड़ ग्रिड से जोड़ा जायेगा. इस लाइन को गोविंदपुर से चंदनक्यारी तक गिरिडीह के कुछ हिस्से भी जोड़ा जायेगा. फिलहाल, डीवीसी की ओर से धनबाद, बोकारो, रामगढ़, चतरा, गिरिडीह, कोडरमा और हजारीबाग में बिजली आपूर्ति करती है. जेबीवीएनएल प्रति दिन लगभग 600 मेगावाट बिजली डीवीसी से इन सात जिलों में आपूर्ति के लिये ले रही है. इस क्षेत्र में अपना ट्रांसमिशन लाइन बनने से डीवीसी पर 200 मेगावाट तक की निर्भरता कम होगी.




