
Ranchi: किसानों से धान लेने के बाद उसे राइस मिल भेजे जाने का प्रावधान है. पर इस मामले में कुछ जिलों में लापरवाही बरती गयी है. झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड ने इसे गंभीरता से लिया है. इस संबंध में उसकी ओर से अलग-अलग जिलों को लेटर भेजा गया है. कहा गया है कि धान अधिप्राप्ति योजना के तहत किसानों से लैम्प्स, पैक्स में धान उठाव किया गया. पर इसके बाद संबंधित लैम्प्स, पैक्स की ओर से इसे राइस मिलों को भेजा नहीं गया. ऐसे में लापरवाही बरतने वाले लैम्प्स, पैक्स से धान की मात्रा के समतुल्य राशि की वसूली की जाये. इस आधार पर संबधित जिलों में जिला सहकारिता पदाधिकारी कार्यालय की ओर से चिन्हित लैम्प्स, पैक्स से पैसे की वसूली किये जाने संबंधी आदेश जारी किये गये हैं.
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3 दिनों में देनी है राशि
गढ़वा में जिला सहकारिता पदाधिकारी ने चयनित लैम्प्स औऱ पैक्सों के खिलाफ एक्शन लेते हुए कहा है कि वे 3 दिनों के अदंर निर्धारित राशि झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड में जमा करा दें. संबंधित लैम्प्स, पैक्स और व्यापार मंडल के अध्यक्ष अपनी अपनी समिति के समक्ष राशि को झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम को जमा करने पर उसकी सूचना जिला सहकारिता पदाधिकारी कार्यालय को भी देंगे. ऐसा नहीं किये जाने पर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष, प्रबंधक के खिलाफ मनी सूट और प्राथमिकी दर्ज की जायेगी.
दस सालों से है बकाया
गौरतलब है कि गढ़वा सहित कुछ जिलों में लैम्प्स, पैक्स के स्तर से किसानों से धान लिये जाने के बाद उसे राइस मिलों को नहीं भेजे जाने का मसला 2011-12 से लंबित है. गढ़वा में इस अवधि से लेकर 2012-13 और 2017-18 का हिसाब बकाया है. 2011-12 खरीफ वर्ष में इस जिले के 35 लैम्प्स, पैक्स के नाम शामिल हैं. इन पर करीब दो करोड़ रुपये (19253768.20 रुपये) बकाया हैं. हालांकि इनमें से चार लैम्प्स की ओर से कुछ पैसे सरकार को दिये जा चुके हैं. बावजूद इसके डेढ़ करोड़ से अधिक (16344768.20 रुपये) रुपये वसूले जाने हैं. 2012-13 की अवधि का 2 करोड़ 70 लाख 28 हजार रुपये से अधिक की राशि 32 लैम्प्स और पैक्स से ली जायेगी. इसके अलावा 2017-18 की अवधि का 12 लाख तीन हजार 838 रुपये की राशि वसूली जानी है.
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