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14 वें वित्त आयोग के संविदाकर्मियों के दोनों हाथ में लड्डू, कोर्ट में केस जीते या हारे फायदा उन्हीं को

Akshay Kumar Jha

Ranchi: 14वें वित्त आयोग में सैंकड़ों कर्मी संविदा पर कार्यरत थे. ये वो कर्मी हैं जिन्हें 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल शुरू होने पर काम से हटा दिया गया था. केंद्र सरकार के निर्देश के मुताबिक 15वें वित्त आयोग का पैसा किसी भी हाल में 14वें वित्त आयोग के कर्मियों पर नहीं खर्च किया जायेगा. ऐसे में राज्य सरकार के पास उन्हें संविदा से हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. काफी आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही उनके हित में कोई निर्णय होगा.

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इधर सरकार की तरफ से 15वें वित्त आयोग में संविदा पर कर्मियों को बहाल करने के लिए परक्षा की तैयारी की जा रही है. सरकार की तरफ से 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत 1300 पदों पर तकनीकी कर्मियों की नियुक्ति के लिए लिखित व दक्षता परीक्षा 5 सितंबर को आयोजित की जायेगी.

परीक्षाफल का प्रकाशन 10 सितंबर को होगा. सितंबर माह के अंत तक जिला स्तरीय पैनल प्रकाशित कर दिया जायेगा. पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है और सभी उपायुक्त सह अध्यक्ष जिला स्तरीय चयन समिति को पत्र लिख कर 15वें वित्त आयोग के अनुदान मद अंतर्गत पंचायतों में कनीय अभियंता एवं लेखा लिपिक सह कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा अनुबंध पर प्राप्त करने के लिए जिला स्तर पर पैनल बनाने का निर्देश दिया है.

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परीक्षा में 30 नंबर का आरक्षण

15वें वित्त आयोग में संविदा कर्मियों की बहाली के लिए 100 नंबर की परीक्षा ली जानी है. 100 नंबर की इस परीक्षा में 50 नंबर शैक्षणिक योग्यता के लिए निर्धारित की गयी है. 10 नंबर एक्सट्रा क्वालीफिकेशन पर दिये जाने हैं.

30 नंबर का आरक्षण वैसे कर्मियों को मिलेगा जिन्होंने 14 वें वित्त आयोग में संविदा पर काम किया है. बाकी सिर्फ 10 नंबर के लिए इन्हें परीक्षा देनी है.

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कोर्ट ने कहा फैसले के मुताबिक ही हो बहाली

संविदा कर्मी बहाली के मामले को लेकर कोर्ट की शऱण में हैं. 17 अगस्त को हुई सुनवाई में कोर्ट ने दो मामलों का हवाला दिया. एक मामला रांची हाइकोर्ट का है और दूसरा दिल्ली हाइकोर्ट का. दोनों मामलों में कोर्ट का आदेश यह है कि पहले जो संविदा पर काम कर रहा है, उसे हटा कर किसी दूसरे को बहाल नहीं किया जा सकता है.

हालांकि कोर्ट ने साफ कहा कि जारी सुनवाई में कोर्ट का जो भी फैसला आयेगा वो ही मान्य होगा. ऐसे में अगर संविदा कर्मी केस हार भी जाते हैं तो सरकार की तरफ से दी गयी आरक्षण की वजह से निश्चित तौर पर 80 फीसदी से ज्यादा बहाली पुराने संविदा कर्मियों की ही होगी.

और अगर संविदाकर्मी केस जीत जाते हैं तो उनकी मांग शत-प्रतिशत पूरी होने की संभावना है. ऐसे में कहा जा रहा है कि संविदा कर्मियों के दोनों हाथ में लड्डू हैं. हारे तो भी और जीते तो भी फायदा उन्हें ही होना है.

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Nayika

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