
Rahul Guru
Ranchi: निजी अस्पतालों में कोरोना के मरीजों का इलाज हो सके, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) जारी किया गया है. एसओपी के तहत निजी अस्पतालों के लिए मानक बनाये गये हैं. निजी अस्पतालों में कोरोना मरीज के इलाज में होने वाले खर्च को लेकर एएचपीआइ (एसोसिएशन ऑफ हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स, इंडिया) की ओर से संभावित खर्च बताया गया है. एएचपीआइ ने चार कैटेगरी में खर्च की जानकारी साझा की है.
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रोजाना 15-35 हजार का आयेगा खर्च
निजी अस्पतालों में कोरोना मरीज का इलाज पर होने वाले खर्च के संबंध में एएचपीआइ के झारखंड चैप्टर के अध्यक्ष डॉ योगेश गंभीर ने जानकारी दी. उन्होंने बताया कि एसोसिएशन के 21 राज्यों में मौजूद चैप्टर के बीच डिस्कशन किया गया. इसके बाद निजी अस्पतालों में कोरोना मरीज के इलाज में आने वाले खर्च आदि को जोड़ कर एक संभावित खर्च तय किया गया है.
यह संभावित खर्च 15 हजार रुपये से 35 हजार रुपये के बीच है. अगर कोरोना का मरीज सामान्य वार्ड में इलाज कराता है तो 15000 रुपये, ऑक्सीजन की सुविधा वाले वार्ड में इलाज कराता है तो 20000 रुपये, आइसीयू में इलाज कराता है तो 25000 रुपये और आइसीयू में वेंटिलेटर के साथ इलाज कराता है तो 35000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से देना होगा.
रांची जैसे शहर में कम आयेगा खर्च
हालांकि डॉ योगेश ने बताया कि दिल्ली जैसे शहरों की यह संभावित दर है. अगर रांची जैसे शहर की बात करें तो यह खर्च और भी कम होगा. दिल्ली जैसे शहरों के मुकाबले रांची जैसे शहरों के अस्पताल का बेड चार्ज काफी कम होता है. ऐसे में संभावित खर्च से भी कम खर्च यहां के अस्पतालों में आयेगा.
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हर अस्पताल में कोविड-19 वार्ड संभव नहीं
डॉ योगेश गंभीर ने सरकार के निजी अस्पताल में कोरोना के इलाज को लेकर जारी आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सरकार का पहले आदेश था कि एक अस्पताल या तो कोविड अस्पताल होगा या फिर नॉन कोविड. अगर अब निजी अस्पताल में कोरोना के मरीजों का इलाज होगा, तो वहां पहले से इलाजरत नॉन कोरोना मरीजों के लिए खतरा होगा. ऐसे में सरकार का यह निर्णय की हर अस्पताल में कोविड-19 वार्ड हो संभव नहीं होगा.
यह वैसे अस्पतालों के लिए सटिक होगा, जहां रिम्स की तरह अलग-अलग बिल्डिंग होगी. अगर सेपरेट वार्ड बनाने की बात करें तो छोटे अस्पतालों में लिफ्ट, सीढ़ियां, रिसेप्शन जैसे कई जगह होते हैं, जहां कोरोना और नॉन कोरोना मरीज का संपर्क में आना लाजमी है. किसी भी तरह से 100 फीसदी आइसोलेशन संभव नहीं है.
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