Khas-KhabarMain SliderRanchi

झारखंड के सबसे बड़े कोविड अस्पताल में ही नहीं मिल पा रही दवा, कैसे ठीक होंगे मरीज  

5 से 6 हजार लगाकर खरीदनी पड़ रही है दवाई, सीधे अस्पताल में मिलने वाली दवा दलालों से खरीदने को मजबूर परिजन

Ranchi: रिम्स को स्टेट डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाया गया है. यहां राज्य भर के गंभीर लक्षण वाले कोरोना मरीजों के इलाज रिम्स के कोविड सेंटर में हो रहे हैं. अक्सर वैसे मरीजों को ही रिम्स में भर्ती कराया गया है, जिनकी स्थिति अन्य कोविड अस्पतालों में संभल नहीं पाती.

ऐसे में भी अगर रिम्स में मरीजों को दवा ही उपलब्ध न हो पाये तो मरीजों का क्या होगा समझा जा सकता है. रिम्स में दवाओं के स्टॉक में कमी के कारण मरीजों को सही से दवा नहीं मिल पा रही है. कई बार मरीजों के परिजन को छोटी-छोटी दवाओं के लिये पर्ची थमा दी जा रही है, जिसें उन्हें बाहर से खरीदना पड़ रहा है. पर, ध्यान देने वाली बात है कि वो सभी दवाएं परिजन आसानी से बाहर से खरीद ले रहे हैं. जब दवाएं रिम्स परिसर में मौजूद दवा दुकानों में मिल जा रही हैं तो फिर वो रिम्स के पास क्यों नहीं है, यह सवालिया निशान लगा रहा है.

इसे भी पढ़ेंः बिहार चुनाव : चिराग का मंसूबा पूरा नहीं होगा, भाजपा ने चेताया, पीएम मोदी के नाम पर वोट नहीं मांग सकते

गंभीर लक्षण वाले अधिकतर मरीजों को रेमडिसिवर इंजेक्शन लगता है. यह इंजेक्शन डायरेक्ट टू हॉस्पिटल सप्लाई है. मतलब यह दवा बनने के बाद सीधे अस्पताल को मुहैया करायी जाएगी. इसे किसी भी दवा दुकानों में बेचने के लिये नहीं दिया जा सकता. यह दवा भी रिम्स के पास उपलब्ध नहीं है. इसके बावजूद पर्ची थमा दी जा रही है. और मरीजों के परिजन यह ले भी आ रहे हैं. अब यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि जिस दवा को सिर्फ अस्पताल के पास होना चाहिये वो मरीज के परिजन बाहर से कैसे ले आ रहे हैं.

एक मरीज के परिजन ने बताया कि रिम्स के जूनियर डॉक्टर ही उन्हें बताते हैं कि दवा देगा कौन. 4500 रुपये में मिलने वाला रेमडिसिविर इंजेक्शन दलाल रिम्स परिसर में ही 6000 से 6500 में बेच रहे हैं. रिम्स फार्मा से जुड़े एक कर्मी ने बताया कि अभी तक तो स्टॉक में दवा नहीं आयी है पर जल्द ही आ जाएगी.

इसे भी पढ़ेंः खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति का मामला: 14 अक्टूबर को 33 प्लेयर्स सरकार को करेंगे मेडल वापस

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button