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Bokaro: ऐसे समय में जब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बड़े पैमाने पर रैलियां की, कांग्रेस ने बोकारो निर्वाचन क्षेत्र में अपने उम्मीदवार के लिए एक भी स्टार प्रचारक या राज्य स्तर का कोई नेता नहीं भेजा है.
कारण जो भी हो पर इसके बावजूद, कांग्रेस प्रत्याशी स्वेता सिंह भाजपा प्रत्याशी विरंची नारायण को कड़ी टक्कर दे रही हैं. बोकारो कांके के बाद दूसरा ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदला था.
यही नहीं, महागठबंधन के तहत कांग्रेस का समर्थन करने वाले राजद और झामुमो जैसे राजनीतिक दल के किसी नेता ने भी श्वेता सिंह के लिए प्रचार करने की जहमत नहीं उठायी.
हालांकि झामुमो और राजद के लोकल नेताओं का सपोर्ट श्वेता सिंह को मिल रहा है. महिला होकर चुनाव में मजबूती से डटे रहने के कारण पब्लिक सेंटीमेंट भी श्वेता सिंह पर शिफ्ट करता दिख रहा है.
हालांकि, जिला कांग्रेस ने कहा कि “पार्टी आलाकमान को हमारे उम्मीदवार के जीतने पर पूरा भरोसा है, उन्होंने उन्ही सीटों पर स्टार प्रचारकों को भेजा जहां उम्मीदवारों को बैकअप की अत्यधिक आवश्यकता थी.”
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भाजपा ने स्टार प्रचारकों का तांता लगा दिया
चौथे चरण के चुनाव के लिए प्रचार शनिवार को समाप्त हो गया. आखिरी दिन श्वेता ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ रोड शो किया.
डोर-टू-डोर अभियान के अलावा, श्वेता सिंह द्वारा नामांकन दाखिल करने के बाद यह एकमात्र रोड शो था, जबकि नारायण दिन पर क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों से मिलने में व्यस्त रहे.
पिछले कुछ दिनों में भाजपा ने बोकारो में स्टार प्रचारकों का तांता लगा दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा, भोजपुरी गायक निरहुआ इत्यादि ने नारायण के पक्ष में वोट करने की अपील की.
पिछले विधानसभा चुनावों के विपरीत, इस बार के चुनाव में पार्टियों के खासकर भाजपा और कांग्रेस के बैनर और पोस्टर भी कम दिखे.
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श्वेता के स्टार प्रचारक बने ससुर समरेश
श्वेता सिंह बोकारो के फायर ब्रांड पूर्व विधायक समरेश सिंह की बहू हैं. इस चुनाव में समरेश सिंह ही श्वेता के लिए स्टार प्रचारक साबित हुए.
उन्होंने कई गांवों का दौरा कर श्वेता को वोट देने के लिए लोगों से अपील की. श्वेता ने कहा, “समरेश सिंह यहां की जनता के लिए जाना-पहचाना चेहरा हैं. मेरे लिए सार्वजनिक रैली की मेजबानी करने के बजाय लोगों से मिलना और बातचीत करना अधिक प्रभावी था.”
हालांकि, कांग्रेस ने जिस दिन संजय सिंह से टिकट ले श्वेता सिंह को दे दिया था, उस दिन से ही वे लाइमलाइट लाइट में आ गयी थीं. लोगों ने उसी दिन से श्वेता सिंह को भाजपा के बिरंची नारायण का प्रतिद्वंदी मान लिया था.
कांग्रेस यह देखते हुए कि भाजपा ने बिरंची नारायण को भारी विरोध के बावजूद उतारा, इसे अवसर समझ अपने पक्ष में करना चाहती है.
महिला होने का फायदा
श्वेता सिंह को उतारने के पीछे कांग्रेस ने यह भी सोचा कि उन्हें समरेश सिंह का बैकअप मिलेगा जो पिछले विधानसभा चुनाव में पहले रनर थे.
महिला उम्मीदवार होने और राजनीतिक आधार होने के कारण श्वेता, नारायण को कड़ी टक्कर दे पायेंगी और हो भी वही रहा है.
भाजपा समर्थकों का मानना है कि यहां के निवासी मोदी पर विश्वास दिखायेंगे और निश्चित रूप से नारायण को जीत दिलायेंगे. चुनाव से एक दिन पहले दिशा बदलती लहर दोनों नेताओं की लड़ाई को कठिन बना रही है.
जेवीएम के प्रत्याशी प्रकाश सिंह और आजसू पार्टी के उम्मीदवार राजेन्द्र महतो ने भी आखिरी समय में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. वे दिन भर मतदाताओं से मिलते हुए दिखाई दिये.
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