
Palamu: विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने हैं. इधर पलामू प्रमंडल में लोग वोट बहिष्कार का निर्णय लेने लगे हैं.
किसी इलाके में सड़क नहीं है तो कहीं का मतदान केन्द्र 3 से चार किलोमीटर दूर है. ग्रामीण लगातार आवाज उठा रहे हैं, लेकिन जिम्मेवार इस पर ठोस निर्णय नहीं ले पा रहे हैं.
मेराल में बदहाल सड़क, रोड नहीं तो वोट नहीं
प्रमंडल के गढ़वा जिल अंतर्गत मेराल प्रखंड के लातदाग गांव के चोरपनिया टोला में खराब सड़क का मुद्दा गहराने लगा है. इसे लेकर टोले के लोग एकजुट हैं.
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यहां के दर्जनों ग्रामीणों ने बैठक कर बदहाल सड़क को चुनावी मुद्दा बनाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया. धर्मराज दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने “रोड नहीं तो वोट” नहीं का नारा लगाते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में वोट का बहिष्कार करने का मन बनाया है.
चार हजार से अधिक की आबादी प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार चार हजार से अधिक आबादीवाला लातदाग गांव जनप्रतिनिधियों के उपेक्षित रवैये का दंश झेल रहा है.
यह गांव 4 टोलों में बंटा हुआ है, जिसमें ठेकहा-उरांव टोला, साह टोला, पासवान टोला तथा चोरपनिया टोला प्रमुख हैं. लोगों ने कहा मुख्य सड़क से किसी भी टोले तक पहुंचने के लिए एक भी सड़क नहीं है.
20-25 वर्ष पहले बनी थी ग्रेड वन सड़क
बीस-पचीस वर्ष पहले गांव में ग्रेट टू की दो सड़क बनी थी, जिससे मुख्य सड़क तक लोगों का आवागमन होता था. उसके बाद गांव में न तो कोई सड़क बनी और न ही पुरानी सड़क की मरम्मती हुई, फलस्वरूप ग्रामीणों का आवागमन अत्यंत कठिन हो गया है. गांव के सभी लोग एकता का परिचय देते हुए संघर्ष करने का मन बना रहे हैं.
चुनाव में सड़क बनाने का वादा कर जनप्रतिनिधि रहते हैं गायब
लोगों का कहना है कि सभी नेता चुनाव में सड़क बनाने का वादा कर वोट लेकर चले जाते हैं. जीतने के बाद 5 साल के बाद ही फिर वोट के समय गांव में पहुंचते हैं.
लोगों का कहना है की बरसात में तो सड़क पर पैदल चलने में भी काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. सड़क खराब रहने से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में भारी फजीहत होती है.
सड़क नहीं होने के चलते लातदाग के सभी टोला के लोग अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
ग्रामीणों ने लौटाये पहचान पत्र, नहीं डालने जायेंगे वोट
प्रमंडल के पलामू जिला अंतर्गत उंटारी रोड प्रखंड की जोगा पंचायत के बिरजा गांव के 962 मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे.
पिछले लोकसभा चुनाव में भी इस गांव के मतदाताओं ने मतदान नहीं किया था. बिरजा के मतदान केंद्र के स्थानांतरण के विरोध स्वरूप यह निर्णय लिया है.
मतदान केन्द्र मर्ज करने का विरोध कर रहे ग्रामीण
यहां उल्लेखनीय है कि बिरजा गांव में मतदान केंद्र (संख्या 150) 1960 से स्थापित था. लेकिन पिछले लोस चुनाव से पूर्व इस मतदान केंद्र का कुल्ही गांव के मतदान केंद्र (संख्या 186) में विलय कर दिया गया है.
बिरजा गांव में 962 मतदाता हैं और कुल्ही गांव में मतदाताओं की संख्या मात्र 360 है. इसके बावजूद मतदान केंद्र का कुल्ही गांव में विलय कर दिया गया.
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गांव में मतदान केन्द्र पुनः स्थापित करने की मांग
इसी बात से बिरजा गांव के मतदाता आक्रोशित हैं. बिरजा गांव में मतदान केंद्र पुनः स्थापित कराने की मांग को लेकर ग्रामीण धरना-प्रदर्शन के अलावा आमरण अनशन भी कर चुके हैं. लेकिन मतदान केंद्र का पुनः स्थापना बिरजा में नहीं हो पाया है. जिससे आहत बिरजा गांव के मतदाताओं ने अपना पहचान पत्र भी बीएलओ को लौटा दिया है.
मतदान केन्द्र पर पैदल आना-जाना काफी कठिन
ग्रामीणों का कहना है कि बिरजा से कुल्ही की दूरी तीन किलोमीटर से भी ज्यादा है. वहां आने-जाने का भी कोई साधन नहीं है. पैदल आना-जाना भी काफी कठिन है.
ग्रामीणों ने इस सम्बंध में पलामू उपायुक्त को पत्र लिख कर मतदान केंद्र को पुनः बिरजा गांव में ही स्थापित करने की मांग की है.
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