
Ranchi : एलेप्पी ट्रेन के रविवार सुबह 8.30 बजे रांची स्टेशन पहुंचते ही ट्रेन से उतरे 600 यात्रियों को बिना COVID-19 जांच के भगा दिया गया था. स्टेशन से भगाये जाने के बाद सभी यात्री खादगढ़ा बस स्टैंड पहुंचे और घर जाने के लिए बसों के परिचालन का इंतजार करने लगे. वहीं न्यूज विंग में खबर चलाये जाने के बाद प्रशासन हरकत में आयी है. मेडिकल टीम खादगढ़ा बस स्टैंड पहुंची है. एलेप्पी और दूसरे ट्रेनों से आये यात्रियों की जांच शुरू की गयी है.
वहीं मौजूद मेडिकल टीम के पास ही स्कैनर मौजूद है. टीम में मौजूद मेडिकलकर्मी थर्मामीटर से सबका बॉडी टेंपरेंचर नाप रहे हैं. हालांकि यात्रियों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि ऐसे में थर्मामीटर से जांच करना रिस्की हो सकता है. इसके अलावा सभी यात्री लाइन में लगे हुए हैं. उनके बीच दूरी भी बहुत कम है.
लगभग 600 यात्री बस स्टैंड में इस वक्त मौजूद हैं. वहीं एलेप्पी ट्रेन के अलावा अन्य ट्रेन से भी प्रवासी मजदूर सूरत से भी पहुंचे हैं. सूरत से रांची लौटे प्रवासी मजदूरों को सड़क पर अपने सामान से साथ जाते देखा गया है. इनका भी मेडिकल चेकअप नहीं किया गया था.
सूरत से लौटे मजदूर खुलेआम सड़कों पर घूमते हुए
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अलग-अलग राज्यों से आये हैं मजदूर
ट्रेन से उतरे सभी मजदूर चेन्नई, महाराष्ट्र के अलावा ओडिशा से भी आये थे. सभी कोरोना अलर्ट के बाद अपने घर लौट रहे हैं. ज्यादातर मजदूर बिहार के हैं, जो घर वापसी करने की तैयारी में हैं. न्यूज विंग की टीम ने जब मजदूरों से बात की तो उन्होंने कहा कि वे सभी कोरोना वायरस को लेकर डरे हुए हैं.
सभी चाहते हैं कि उनका भी चेकअप कर लिया जाये, तभी वे निश्चिंत होकर अपने परिवार के पास जाये. साथ ही कहा कि यदि हममे से कोई भी कोरोना पॉजिटिव है तो उसे इलाज के लिए ले जाया जाये. ताकि बीमारी उनके परिवार या अन्य किसी को ना फैले.
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काफी देर से आये मजदूर कर रहे थे इंतजार
गौरतलब है कि रांची स्टेशन पर उतरकर सभी मजदूर वहीं बैठ गये और इंतजार में थे कि उनका कोरोना को लेकर चेकअप किया जायेगा. सभी मजदूर कुछ देर तक स्टेशन पर ही बैठे रहे और इंतजार में करने लगे. लेकिन काफी देर तक ना तो उन्हें कोई पूछने आया और ना ही कुछ कहने ही आया.
कुछ देऱ बाद आरपीएफ के कुछ जवानों ने सभी मजदूरों को स्टेशन से भगा दिया. सभी मजदूर स्टेशन की पार्किंग में बैठ गये और इस इंतजार में थे कि उनका कोरोना चेकअप होगा. लेकिन वहां भी ना तो कोई व्यवस्था थी और ना ही कोई टीम मौजूद थी. ये तो बात पार्किंग की थी. लेकिन जब मजदूरों से बात की गयी तो पता चला कि स्टेशन पर भी ना तो कोई जांच टीम मौजूद थी और ना ही कोई स्वास्थ्यकर्मी.
वहीं स्टेशन की पार्किंग में बैठे मजदूरों ने बताया कि शाम 4.50 बजे मौर्य एक्सप्रेस ट्रेन से सभी अपने घर जायेंगे. लेकिन जब उन्हें पता चला कि सभी ट्रेनें रद्द् हैं तो वे सोच में पड़ गये. इसी बीच आरपीएफ के जवानों ने उन्हें पार्किंग से भी भगा दिया. तो वहां से निकलकर सभी मजदूर रांची स्थित खादगढ़ा बस स्टैंड पहुंचे. लेकिन सभी बसों का परिचालन भी बंद होने की वजह से कई गुटों में बंटकर मजदूर बस स्टैंड पर ही बैठे हैं.
लेकिन बस स्टैंड पर भी यही आलम देखने को मिला. ना तो चेकअप की कोई व्यवस्था थी और ना ही कोई स्वास्थ्यकर्मी ही मौजूद दिखे. ऐसे में चाहकर भी मजदूर अपना चेकअप आखिर कैसे करवायें.
वहीं कोडरमा जाने के लिए बैठे कुछ लोगों ने खादगढ़ा स्थित टीओपी में थाना प्रभारी से कहा कि वे चाहते हैं कि उनका कोरोना चेकअप हो. क्योंकि वे नहीं चाहते कि यदि वे कोरोना पॉजिटिव हों तो उनके माध्यम से किसी और इस महामारी का शिकार हो.
लोग जागरूक लेकिन लापरवाह सिस्टम
कोरोना को महामारी घोषित करने के वाबजूद जिला प्रशासन और रेलवे के इस लापरवाह रवैये ने सभी आदेशों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं. लोग जागरुक हैं और एक जिम्मेवार नागरिक बनकर कोरोना चेकअप के लिए तैयार भी हैं. लेकिन लापरवाह सिस्टम के आगे बेबस हैं. लेकिन प्रशासन को भूलना नहीं चाहिए कि रविवार को ही पटना के एम्स में एक 38 साल के शख्स की मौत कोरोना से हो गयी है. ऐसे में रेलवे की लापरवाही से झारखंड में भी कोई अनहोनी होती है तो जिम्मेवार किसे माना जायेगा.
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