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झारखंड पुलिस के लिए डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर खरीद में घोटाला!

Ranchi:  मुख्यमंत्री रघुवर दास का दावा है कि उनका कार्यकाल बेदाग है. पर, सरकार पर एक और दाग लगने जा रहा है. इस बार सुरक्षा के नाम पर नियम-कानून को ताक पर रख कर एक प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए चालाकियां किये जाने का आरोप लगा है. मामला है झारखंड पुलिस के लिए डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर की खरीद का. इस खरीद के प्रकरण को घोटाला इस वजह से बोला जा रहा है, क्योंकि जो डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर झारखंड पुलिस खरीद रही है, वो उसके बाजार मूल्य से कई गुणा ज्यादा कीमत पर खरीदा जा रहा है. जिस मेटल डिटेक्टर को सरकार 5465 यूएस डॉलर (करीब 4.26 लाख रुपया) में खरीदने जा रही है. उसका बाजार मूल्य ऑनलाइन और रिटेल दोनों जगहों पर 3000-4000 यूएस डॉलर (2.00 से 3.00 लाख) है. यानी सरकार एक मेटल डिटेक्टर पर करीब 1500 यूएस डॉलर कंपनी को ज्यादा भुगतान कर रही है. इसके अलावा पुलिस विभाग को 18 प्रतिशत जीएसटी औऱ 10 प्रतिशत (दोनों मिला कर करीब 1.19 लाख रुपया) इंपोर्ट ड्यूटी का भी भुगतान करना है. इस तरह जो डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर खुदरा बाजार में दो से तीन लाख की कीमत पर उपलब्ध है, उसे झारखंड पुलिस 5.45 लाख रुपये में खरीद रही है.

अनिल पाल्टा की आपत्ति पर डीजीपी ने पहले टेंडर कैंसल किया था

डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर खरीद में एक कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए सीवीसी के नियमों को ताक पर रखा गया. यहां तक की गृह मंत्रालय द्वारा इसके लिए जो स्पेसिफिकेशन तय है, उसे भी नजरअंदाज किया गया था. सिर्फ एक कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर निकाला गया था. तब आइपीएस अनिल पाल्टा एडीजी मॉर्डनाइजेशन हुआ करते थे. उन्होंने फाइल पर आपत्ति दर्ज की. जिसके बाद डीजीपी ने टेंडर कैंसल कर दिया था. जिसके कुछ दिनों बाद अनिल पाल्टा का उस पद से तबादला कर दिया गया. और दुबारा वही टेंडर निकाला गया. सबसे खास बात यह है कि इस खरीद के लिए प्रोडक्ट डेमो के लिए भी सिर्फ एक ही कंपनी को बुलाया गया. सूत्रों के मुताबिक आपा-धापी में खरीद के पीछे लोकसभा चुनाव को बहाना बनाया गया और कहा गया कि 65-70 दिनों में डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर की सप्लाई कर दी जाएगी. लेकिन गौर करने वाली बात है कि इतने दिनों में तो चुनाव सिर पर आ जाएगा. आपूर्ति चुनाव के बाद ही संभव है.

मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स की गाइडलाइन की अनदेखी, सचिव से शिकायत

टेंडर प्रक्रिया में मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेर्यस की गाइडलाइन की काफी अनदेखी की गयी है. मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स की गाइडलाइन के मुताबिक इस तरह के टेंडर को GeM (Government e Marketplace) पर डालना अनिवार्य है. लेकिन इस टेंडर को GeM पर नहीं डाला गया. मामले को लेकर रांची हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजनी रंजन ने गृह कारा विभाग के सचिव एसकेजी राहटे को लिखित शिकायत की है. शिकायत में कहा गया है कि चुनाव का बहाना बना कर इस खरीदारी में जल्दबाजी दिखायी जा रही है, लेकिन डिटेक्टर चुनाव तक पहुंच ही नहीं सकता. झारखंड पुलिस के पास पहले से भी ऐसे 1000 मेटल डिटेक्टर हैं. फिर भी अगर विभाग को ज्यादा डिटेक्टर की जरूरत पड़ती है, तो विभाग किराए पर डिटेक्टर ले सकता है. यह महज 3000-4000 रुपए प्रति महीने पर उपलब्ध है. इस शिकायत की एक-एक कॉपी डीजीपी झारखंड डीके पांडे,  एडीजी अनिल पाल्टा, एडीजी मॉर्डनाइजेशन आरके मल्लिक और आइजी प्रोविजन अरुण सिंह को दी गयी है.

शिकायत में नहीं है कोई सच्चाईः पुलिस विभाग

इस मामले में पूछे जाने पर पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता आरके मल्लिक ने कहा कि उन्हें इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है. खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी ही विस्तृत रुप से जानकारी दे सकते हैं. खरीद प्रक्रिया से जुड़े पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर कुछ भी बताने से इंकार किया. उन्होंने सिर्फ यह कहा कि जो शिकायत मिली है, उसमें कोई सच्चाई नहीं हैं. इसके बाद भी अगर पुलिस मुख्यालय की तरफ से डोर मेटल डिटेक्टर की खरीद में हुए कथित घोटाले को लेकर कोई विस्तृत जानकारी दी जाती है, तो न्यूज विंग उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेगा.

खरीदारी सीवीसी के नियमों के मुताबिक हुई हैः आइजी

डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर की खरीद में गड़बड़ी के संबंध में आइजी प्रोविजन अरुण सिंह ने कहा कि सारी खरीदारी नियम संगत और सीवीसी के नियमों के मुताबिक हुई है. पहली नजर में यह शिकायत फर्जी दिखती है. बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर यह मेटल डिटेक्टर खरीदा जा रहा है. यह मेटल डिटेक्टर देश के कई प्रतिष्ठित कार्यालय में लगा हुआ है. तकनीकी क्रय समिति की अनुशंसा के आधार पर ही सारी खरीदारी हुई है. जिस कंपनी से खरीदारी हो रही है वह टेंडर के बाद एल1 साबित हुई है. उसी की नियम-शर्तों पर सारी खरीदारी की जा रही है. GeM पोर्टल पर टेंडर दो बार डाला गया था. कई कंपनियां आयीं उसके बाद ही खरीदारी हो रही है.

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