
Deoghar: रविवार को झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ शाखा देवघर की बैठक कुष्ठ आश्रम रोड अवस्थित संघ कार्यालय में जिलाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित की गई, बैठक में कर्मचारियों के ज्वलंत समस्याओं पर विचार विमर्श किया गया. इस दौरान मुख्य रूप से जिन निर्णयों पर सहमति बनी उसमें जिले के स्थापना समिति की बैठक में 2211 शीर्ष में पदस्थापित कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर 2210 शीर्ष में पदस्थापन किए जाने, नियमित कर्मचारियों के एसीपी, एमएसीपी के बकाया एरियर के भुगतान जल्द करने के अलावा विभागीय आदेश के आलोक में एनएचएम के तहत अनुबंध पर नियुक्त समस्त कर्मचारियों को 15 प्रतिशत अनुभव भत्ता का भुगतान कर मूल मानदेय में समायोजित करने का मांग शामिल है.
बैठक में मुख्य रुप से संघ के राज्य उपाध्यक्ष अरुण कापरी, संघ के जिला सचिव अरुण प्रसाद यादव, उपाध्यक्ष रीना कुमारी, अनुबंध एएनएम जीएनएम संघ देवघर की जिला अध्यक्ष अलका कुमारी, आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष दिव्यांशु कुमार, जिला सचिव अजय कुमार रजवार सहित विभिन्न प्रखंडों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. बैठक को अरुण कापरी, मनोज कुमार मिश्र, अरुण प्रसाद यादव, अलका कुमारी ,दिव्यांशु कुमार एवं अजय कुमार रजवार ने संबोधित किया.बैठक में उपरोक्त के अलावे त्रिलोकीनाथ पांडेय, धीरेंद्र सिंह, कृष्णा कुमार यादव, फाल्गुनी प्रसाद यादव, राम आशीष दास, विनय सिंह, हरिराम सिंह, राकेश झा, प्रीतम सिंह, मुन्ना कुमार सिंह, पिंटू कुमार राय, नागेश्वर झा, जितेंद्र कुमार, धनंजय राउत, दशरथ राउत, कुमारी प्रज्ञा, बुद्धिनाथ झा, निरंजन कुमार, मीना कुमारी, शिलाजीत शाही, गुलशन यादव, बबलू कुमार दास, रणधीर कुमार, जितेंद्र शर्मा, पान मुर्मू, विकास कुमार, मृत्युंजय चौबे, अफताब अंसारी, अफजाल अंसारी, मुकेश यादव, बाजल हंसदा, लता कुमारी, आभा देवी, रेनू कुमारी, विपिन कुमार, पिंकी कुमारी, अजय प्रसाद यादव सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
इसके साथ ही मुख्य रूप से सिविल सर्जन देवघर के पत्रांक 1153, 25 मई 23 के आधार पर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के पारिश्रमिक भुगतान में सरकार द्वारा निर्धारित पारिश्रमिक से आधे से भी कम राशि के भुगतान की बातों को देखते हुए सर्वसम्मति से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन भुगतान में की जा रही सालाना करोड़ों रुपये की हेराफेरी को मुख्यमंत्री सहित विभागीय पदाधिकारियों को पत्र लिखकर सही भुगतान कराने की मांग की। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के पारिश्रमिक भुगतान में सालाना करोड़ों रुपए के हेराफेरी की जांच कर सभी कर्मचारियों को हेराफेरी की गई राशि के भुगतान करने तथा इस हेराफेरी में संलिप्त कंपनी तथा विभागीय पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने की मांग करने का निर्णय लिया गया। यदि उपरोक्त सभी मांगों पर जल्द कार्यवाही करते हुए समाधान नहीं किया गया तो संगठन के द्वारा आंदोलन करने की बात कहीं गई.




