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Jharkhand: पूर्व कृषि मंत्री रणधीर सिंह का दावा, ऋण माफी के लिए सैकड़ों किसान लगा रहे बैंक का चक्कर

Ranchi: पूर्व कृषि मंत्री और सारठ विधायक रणधीर कुमार सिंह ने कृषि विभाग पर हमला बोला है. उनके मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 में कृषि विभाग अपने कुल बजट का तरीके से अब तक उपयोग नहीं कर सका है. मात्र 55.69 प्रतिशत राशि ही विभाग खर्च कर सका है. बाकी पैसा सरेंडर करवा दिया गया. उन्होंने पूछा है कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेवार कौन है. उनके मुताबिक केसीसी ऋण माफी के लिए कृषि मंत्रालय ने जो बजट रखा था, वो बजट भी खर्च नहीं हो पाया है. ऋण माफी के लिए सैकड़ों किसान विभागीय पदाधिकारियों के कहने पर प्रज्ञा केंद्र गये. इसके लिए एक रुपए का टोकन कटवाया. अब वे ऋण माफी के लिए बैंक का चक्कर लगा रहे हैं. समय पर बजट का पैसा खर्च नहीं होना काफी चिंता का विषय है.

क्या कहा था सदन में सरकार ने

गौरतलब है कि पिछले दिनों झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार ने सदन में बताया था कि सरकार की मुख्य प्राथमिकता किसानों को ऋण से मुक्त कराना है. सूखा से राहत दिलाना और उनके आय में वृद्धि भी करना है. झारखंड कृषि ऋण माफी योजना के माध्यम से 4.5 लाख से अधिक किसानों के बीच 1 हजार सात सौ सत्ताईस करोड़ रुपये की ऋण माफी की गयी. सुखाड़ राहत को प्रत्येक किसान परिवार को 3500 रुपये की दर से लगभग 13 लाख किसानों के खाते में 461 करोड़ रुपये अनुग्राहिक राशि ट्रांसफर की गयी. इन दोनों योजनाओं के लाभ से अब तक वंचित किसानों को वित्तीय वर्ष 2023-24 में लाभान्वित किया जायेगा.

बकाये भुगतान के इंतजार में किसान

इधर, राज्य के हजारों किसान धान बेचने के बाद से मायूस हैं. जानकारी के अनुसार, 30 हजार से अधिक किसानों ने राज्य सरकार क पास धान बेचे पर इसके लिए पेमेंट अब तक नहीं हुआ है. किसानों का राज्य सरकार पर 167 करोड़ बकाये की सूचना है. वित्तीय वर्ष 2022-23 में राज्य के किसानों ने करीब 17 लाख क्विंटल धान राज्य सरकार को बेचा है जिसका पैसा अब तक नहीं मिल पाया है. हालांकि राज्य सरकार की ओर से अब तक 27 हजार से अधिक किसानों को पहली किस्त के रुप में 149.15 करोड़ का भुगतान कर दिया है. पर तीन महीने से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद दूसरी किस्त की राशि और बोनस का इंतजार है.

किसानों से 15 दिसंबर 2022 से धान की खरीद की प्रक्रिया शुरू हुई थी. खरीदारी के समय किसानों को एमएसपी सरकार की ओऱ से 2040 रुपये प्रति क्विंटल तय की गयी थी. तीन माह में एमएसपी की बची 50 फीसदी राशि के साथ सरकार को प्रति क्विंटल 10 रुपये का भुगतान बोनस के तौर पर करना था जो अब तक नहीं हुआ है. दूसरी किस्त के तौर पर 150 करोड़ और बोनस के रुप में 17 करोड़ का भुगतान होना बाकी है. वैसे झारखंड स्टेट फूड कॉरपोरेशन के एमडी यतींद्र प्रसाद के मुताबिक किसानों को दूसरी किस्त का भुगतान मिल में धान देने के बाद किया जाता है. फिलहाल चावल मिलों से आने लगा है. जल्द ही किसानों को बोनस की राशि का भुगतान किया जायेगा.

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