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जेट एयरवेज पर इस वक्त 9430 करोड़ रुपए का कर्ज है! …क्या कोई बतायेगा कि जेट एयरवेज को मोदी सरकार क्यों बचा रही है?

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Girish Malviya

क्यों मोदी जी जेट एयरवेज को बचाने में पर्सनल इंटरेस्ट ले रहे हैं ? क्या जेट एयरवेज कोई सरकारी कम्पनी है? और सरकारी संपत्ति एयर इंडिया की तो संपत्ति तक टुकड़े-टुकड़े करके बेचने की योजना है, लेकिन जेट का एक साथ ही पूरा सौदा करने का टाटा पर दबाव बनाया जा रहा है आखिर क्यों? क्या इसका कारण यह है कि जेट के मालिक नरेश गोयल को मोदी सरकार ने 2015 में पीएनबी से एक बड़ा लोन दिलवाया है?…नरेश गोयल ने जेट में अपनी 51 फीसदी की पूरी शेयर होल्डिंग को पंजाब नेशनल बैंक के पास 2015 में गिरवी रख दिया था, जिसकी कीमत उस वक्त 2600 करोड़ रुपये आंकी गयी थी ओर उस वक्त गोयल द्वारा शेयरों को गिरवी रखे जाने के निर्णय की वजह की जानकारी नहीं दी गई थी.

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और एक तथ्य जान लीजिए 2016 से ही नरेश गोयल दुबई और लंदन में आलीशान जीवन बिता रहे हैं यानी उन्हें माल्या की तरह देश छोड़ कर भागने की कोई जरूरत नहीं है, वह ऑलरेडी बाहर ही हैं. एविएशन सेक्टर के एक्सपर्ट पिछले महीने ही बता थे कि जेट को 3500 करोड़ रुपए की तत्काल जरूरत है. इसके अलावा 2800 करोड़ रुपए के कर्ज की रीस्ट्रक्चरिंग भी करवानी होगी. बैंक उसे पैसा देना नहीं चाहते. स्टेट बैंक जो कि पहले ही उसे 2000 करोड़ रुपए का लोन दे चुका है, ने इस जून तिमाही के नतीजों को जारी करने के बाद कहा था कि जेट एयरवेज को हमने कर्ज दिया हुआ है.

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यानी वही बात है कि पहले अपने चहेते उद्योगपति को बेहिसाब कर्ज दो और उसके बाद उसका सेटलमेंट कराते रहो और बाई द वे आपने तो जो दीवालिया कानून बनाया था, जो साल भर में रिजल्ट दे देता है, उसके पास यह मामला क्यों नहीं भेज देते. सीधी ओर सच्ची बात तो यह है कि अगले 6 महीने में ही मोदी जी को आम चुनाव का सामना करना है. नरेश गोयल को वह एक और नीरव मोदी और विजय माल्या बनने देना नहीं चाहते.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं) 

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