
Palamu: 16वीं लोकसभा चुनाव में हर दिन कुछ न कुछ राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ रहा है. इससे हर दिन चर्चा हो रही है. पिछले दिनों महागठबंधन द्वारा सीटों के बंटवारे पर असंतोष जाहिर करते हुए राष्ट्रीय जनता दल के कई नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी.
बाद में जिला स्तर के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा भी दे दिया था. इनमें जदयू के प्रदेश महासचिव बैजनाथ राम गोपी, प्रदेश सचिव बलराम तिवारी और राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य अशोक निगम भी शामिल हैं.
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जदयू के चुनाव नहीं लड़ने पर नाराजगी
तेजी के बदलते राजनीतिक घटनाक्रम में झारखंड में जदयू के लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने से पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में आक्रोश है. इसकी प्रतिक्रिया भी शुरू हो गयी है. पार्टी आलाकमान की मनमानी से क्षुब्ध पलामू से जुड़े पांच दर्जन से अधिक जदयू नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.
आश्वासन के बाद भी नहीं लड़ा गया चुनाव
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को भेजे सामूहिक त्याग पत्र में क्षुब्ध नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा है कि जदयू के राज्य प्रभारी ने आश्वस्त किया था कि झारखंड में पार्टी सात-आठ संसदीय सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी.
प्रदेश समिति में इस आशय का प्रस्ताव भी पारित किया गया, लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व ने मनमाने तरीके से झारखंड में चुनाव नहीं लड़ने का एकतरफा निर्णय ले लिया.
इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में घोर निराशा हुई है. उनका आरोप है कि झारखंड में जदयू एक राजनीतिक पार्टी न होकर एनजीओ बनकर रह गयी है, जिसे संयोजक चलाते हैं.
इन नेताओं ने भी दिया इस्तीफा
पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वालों में अन्य लोगों के अलावा अधिवक्ता पंकज किशोर पाठक, जदयू महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष एसबी पाठक, अधिवक्ता सत्यप्रकाश दुबे, देवेन्द्र कुमार तिवारी, सुमित कुमार, पंकज कुमार झा, सुशील पांडेय, रविन्द्र विश्वकर्मा, संध्या देवी, अरविन्द तिवारी भी शामिल हैं. त्याग पत्र में पार्टी के कुल 65 कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं.
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