
Dhanbad : भगवान भोलेनाथ के आंगन में अब मां सरस्वती की वंदना की जाएगी. भुईफोड़ मंदिर में स्थित शिव मंदिर में शिव आराधना के साथ मां शारदे की साधना भी जल्द शुरू होगी. यहां बच्चे आएंगे, उनको भक्ति के साथ शिक्षा का पाठ भी पढ़ाया जाएगा. भारत सेवाश्रम संघ के सदस्य शिक्षक होंगे. मंदिर परिसर में भारत सेवाश्रम संघ तीन मंजिला विद्यालय बनवा रहा है. इसमें हर जाति के बच्चों को शिक्षा दी जाएगी.
भारत सेवाश्रम संघ के सदस्यों ने बताया कि इस स्कूल में बच्चों के लिए मंदिर परिसर में ही छात्रावास की व्यवस्था भी होगी. बच्चे यहां रहकर अध्ययन कर सकेंगे. मंदिर का माहौल भक्तों को ज्ञान साधना में एकाग्र करेगा. विद्यार्थी भगवान की भक्ति भी करेंगे, किताबों में मन लगाकर दुनिया का ज्ञान भी लेंगे. सुबह शाम की आरती के अलावा किसी भी पूजन कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिलेगा.
झारखंड बोर्ड के माध्यम से दिलाई जाएगी परीक्षा
विद्यालय का निर्माण तेजी से हो रहा है. 35 फीट चौड़ा व 70 फीट लंबा विद्यालय बन रहा है. इसमें 24 कमरे तैयार किए जा रहे हैं. मंदिर परिसर में विद्यालय की निर्माण की खबर सुन श्रद्धालुओं का सहयोग भी मिल रहा है. दसवीं के बच्चों को झारखंड बोर्ड के माध्यम से परीक्षा दिलाई जाएगी.
200 साल पुराना मंदिर, पुजारी भी पढ़ाएंगे
धनबाद-गोविंदपुर मार्ग पर स्थित भुईफोड़ मंदिर करीब दो सौ साल पुराना है. यहां जमीन से शिवलिंग प्रकट हुआ था, इसलिए नाम भुईफोड़ पड़ गया. 60 साल पहले बाकायदा मंदिर बना. मंदिर की व्यवस्था भारत सेवाश्रम संघ देखता है. संघ ने निर्णय लिया है कि पूजा के साथ बच्चों को ज्ञान दिया जाएगा, ताकि यहां से निकले बच्चे देश के विकास में अहम भूमिका निभाएं. यहां बच्चों को एक से दसवीं कक्षा तक पढ़ाया जाएगा. शुरुआत एक से पांचवी तक की पढ़ाई से होगी. कमजोर विद्याथियों को अलग से अतिरिक्त क्लास लेकर पढ़ाया जाएगा. इसके अलावा मंदिर में महिलाओं प्रणवानंद सलाई प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे स्वावलंबी बनें.

भुईफोड़ मंदिर भारत सेवाश्रम संघ संरक्षक स्वामी प्रयागात्मानंद ने बताया कि जरूरतमंद बच्चों को मंदिर परिसर में बन रहे विद्यालय में पढ़ाया जाएगा.
बच्चों की जिस दिशा में रुची रहेगी, उस दिशा में आगे बढ़ाएंगे. उनको अपने देश की परंपराओं में बताया जाएगा. यहां के अध्यात्मिक माहौल में बच्चे बेहतर तरीके से एकाग्रचित्त होकर पढ़ सकेंगे. विद्यार्थिकों के भोजन व रहने की व्यवस्था होगी. यहां पढ़ने जो बच्चे आएंगे उनको भगवान की आरती व पूजा में शामिल होना अनिवार्य होगा.




