
Ranchi: मुख्यमंत्री उज्जवल झारखंड योजना के तहत एक बार फिर से टेंडर रद्द कर दिया गया है. योजना के तहत राज्य के छुटे हुए गांवों को विद्युतिकृत किया जाना है. ऐसे में झारखंड बिजली वितरण निगम की ओर से 21 जिलों के लिये जारी टेंडर रद्द कर दिया गया है. जेबीवीएनएल की मानें तो टेंडर रद्द संवेदकों की ओर से रूचि नहीं लेने के कारण किया गया है.
इन 21 जिलों में पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सिमडेगा, पलामू, रांची, लातेहार, गढ़वा, गोड्डा, चतरा, गिरिडीह, पाकुउ़, साहेबगंज, देवघर, खूंटी, लोहदरदगा, सरायकेला खरसावां, धनबाद, बोकारो, दुमका, रामगढ़, जामताड़ा शामिल है.
निगम की मानें तो इन जिलों के चिन्हित गांवों और टोलों का विद्युतिकरण किया जाना है. जिसके लिये टेंडर के माध्यम से प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट का चयन किया जाना है. प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट विद्युतिकरण के लिये जेबीवीएनएल को सहायता और सर्विस उपलब्ध करायेगी. जारी टेंडर कुल 21.82 करोड़ रूपये की थी.
दिसंबर में भी जारी किया गया था टेंडर
इसके पहले दिसंबर में प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट के लिये जेबीवीएनएल ने टेंडर जारी किया था. जिसे जनवरी में रद्द कर दिया गया था. इसके बाद फिर से जनवरी में अविद्युतिकृत टोलेां गांवो के विद्युतिकरण के लिये टेंडर जारी किया गया. लेकिन इस टेंडर को भी 30 जनवरी को रद्द कर दिया गया.
2817 गांव पूर्ण अविद्युतीकृत
झारखंड बिजली वितरण निगम की मानें तो राज्य में 9322 गांव और टोले ऐसे है जहां बिजली नहीं है. इनमें से कुछ गांव और टोले आंशिक रूप से विद्युतीकृत है. हालांकि योजना के तहत सभी गांवों और टोलों को चिन्हित कर कार्य किया जाना है. पूर्ण अविद्युतीकृत टोलों की संख्या 2817 है. आंशिक रूप से अविद्युटीकृत टोलों और गांवों की संख्या 4980 है.
वहीं, ऐसे शहरी क्षेत्र जहां आंशिक विद्युतीकरण है उनकी संख्या 1525 है. पूर्ण विद्युत रहित टोलों या गांवों में विद्युत रहित घरों की संख्या 70, 607 है. आंशिक विद्युतकृत गांवों या टोलों में बिजली रहित घरों की संख्या 126185 है. जबकि शहरी क्षेत्र में 41773 घरों में बिजली नहीं है. कुल विद्युत रहित घरों की संख्या 238565 है.
1485.39 करोड़ की योजना
मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना के लिये राज्य सरकार की ओर से 1485.39 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गयी है. योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के अविद्युतीकृत टोलो घरों और शहरी क्षेत्र के हुए अविद्युतीकृत स्थानों को विद्युतीकृत किया जाना है. योजना के लिये सभी जिला उपायुक्तों से सूची मांगी गयी थी. जिसके आधार पर योजना तैयार की गयी है.




