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जमशेदपुर : उषा मार्टिन की 190 करोड़ की संपत्ति अटैच, प्रवर्तन निदेशालय ने की कार्रवाई

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Jamshedpur : प्रवर्तन निदेशालय पटना ने उषा मार्टिन को तगड़ा झटका दिया है. निदेशालय ने कंपनी की 190 करोड़ की संपत्ति अटैच कर दी है. साथ ही आदेश दिया है कि कंपनी 180 दिनों तक न तो संपत्ति का हस्तांतरण कर सकेगी और न ही बेच सकेगी.

इससे टाटा कंपनी भी सकते में हैं, क्योंकि उषा मार्टिन के स्टील डिवीजन को टाटा ने 4300 करोड़ में खरीद लिया है. लेकिन इडी के आदेश के बाद अब टाटा का भी इंतजार लंबा हो जायेगा.

नये डिवीजन से ऑपरेशन शुरु करने को लेकर टाटा पहले भी जल्दी दिखा चुका है. उषा मार्टिन के स्टील डिवीजन की बिक्री के समय टाटा स्पंज के साथ जो समझौता हुआ था, उसमें साफ कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय में लंबित मनी लांड्रिंग के मामले में जो भी फैसला होगा और जो भी देनदारी होगी, उसका वहन टाटा स्पंज को करना होगा.

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क्यों हुई ये कार्रवाई

झारखंड में टाटा के बाद निजी क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी उषा मार्टिन की संपत्ति अटैच करने के पीछे ईडी की दलील है कि कंपनी ने पश्चिम सिंहभूम के धटकुरी खदान से अवैध खनन किया है. साथ ही कंपनी ने अपने फायदे के लिए लौह अयस्क भी बेचा.

जबकि कंपनी को खदान का इस्तेमाल खुद के लिए करना था. 9 अगस्त को ईडी पटना ने अटैचमेंट नोटिस जारी कर दिया था. लेकिन उषा मार्टिन ने आदेश की रिसीवींग 16 अगस्त की दिखाई है.

उष मार्टिन कंपनी की सचिव शंपा घोष ने इसकी जानकारी NSC BSC और लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज को दी. तब मामले का खुलासा हुआ. ईडी के इस आदेश के बाद कर्ज के बोझ में दबी उषा मार्टिन की मुश्किलें और बढ़ गयी हैं.

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आदेश क्यों है उषा मार्टिन के लिए मुसीबत

इस आदेश के बाद कंपनी के शेयर में करीब 24 रुपए की गिरावट है. जिससे शेयर बाजार और उद्योग जगत सकते में है और शेयर होल्डर के बीच हड़कंप मचा हुआ है. ये भी तय है की उषा मार्टिन से इस्पात डिवीजन खरीदने वाली कंपनी टाटा स्पंज पर भी इसका असर पड़ेगा.

उधर कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच भी कई तरह के सवाल हैं, जिसका जवाब कंपनी को देना अभी बाकी है. कंपनी के अंदर श्रमिक संघ भी अधिकारियों पर अंधेरे में रखने का आरोप लगा रही है. साथ ही ये भी कह रही है कि जिन अधिकारियों की वजह से कंपनी इस हाल में पहुंची है, उनपर कड़ी कार्रवाई की जाए.

उषा मार्टिन का अपना ही तर्क

उषा मार्टिन कहती है की कंपनी को झारखंड हाई कोर्ट ने फरवरी 2012 में धटकुरी खदान से लौह अयस्क बेचने के फैसले पर सहमती जतायी थी, लिहाजा कंपनी पर अवैध तरीके से लौह अयस्क के व्यापार का आरोप गलत है. फिर भी कंपनी लीगल विभाग से सलाह ले रही है. इन सबके बावजूद कंपनी के कामकाज पर इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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