न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

EESL के बल्ब लगाने के मामले में क्या सच बोल रही है बीजेपी?

3,240

Akshay/Pravin

Ranchi: न्यूज विंग ने सबसे पहले आठ जून को “पंचायतों को रोशन करने की है योजना या 63 करोड़ कमीशनखोरी का है प्लान!” शीर्षक से खबर प्रकाशित किया. 16 अगस्त को नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने सीएम के नाम खुला पत्र लिखा और पंचायतों में बल्ब लगाने के मामले में साफ तौर से कमीशनखोरी का आरोप लगाया. हेमंत ने कहा कि एक 24 वाट के बल्ब की कीमत फिट करा कर 1941.55 रुपया सरकार की तरफ से तय किया गया है, जिसमें जीएसटी अलग से जुड़ना है. वहीं हर महीने रख-रखाव के नाम पर 14.71 रुपया लगेगा. जबकि बाजार से अच्छी कंपनी के बल्ब की कीमत महज 950 रुपये है. हेमंत सोरेन का खुला पत्र अखबारों में छपने के बाद झारखंड सरकार की तरफ से इसका खंडन नहीं किया गया. लेकिन बीजेपी की तरफ से हेमंत सोरेन के पत्र का खंडन किया गया.

इसे भी पढ़ें – जमशेदपुरः टाटा मोटर्स में नोकरी नहीं मिलने से निराश युवक ने की आत्महत्या

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहा कि झामुमो नहीं चाहता कि गांवों में बिजली पहुंचे और वहां की सड़कें रोशन हों. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन का दाव तथ्यहीन है. प्रतुल शाहदेव ने कहा कि राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में सामान दर लागू करने के लिए यह काम ईईएसएल को दिया, जो भारत सरकार की स्वामित्ववाली कंपनी है. कहा कि हेमंत सोरेन गलतबयानी कर रहे हैं कि एक बल्ब की कीमत 1850 रु. है. सच्चाई यह है कि एक बल्ब की कीमत सिर्फ 1350 रुपये है. यह कंपनी आंध्र प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों में भी काम कर रही है. हालांकि श्री शाहदेव ने यह साफ नहीं किया कि उन्होंने जिस कीमत का जिक्र किया है वह सिर्फ बल्ब की कीमत है या फिर पूरी स्ट्रीट लाइट यूनिट की. उल्लेखनीय है कि हेमंत सोरेन ने जिस कीमत का जिक्र किया है उसमें पूरी यूनिट की कीमत 1941 रुपये और जीएसटी अलग से है. हेमंत सोरेन ने सरकार के नोटिफिकेशन की कीमतें ही कोट की हैं. भाजपा प्रवक्ता ने हेमंत सोरेन के पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि नेता प्रतिपक्ष ने प्रति बल्ब की कीमत 1850 रुपये बतायी है. यह 1850 रुपये का जिक्र कहां किया गया है, यह स्पष्ट नहीं है. इसका कोई नोटिफिकेशन भी उपलब्ध नहीं है.

इसे भी पढ़ें – पंचायतों को रोशन करने की है योजना या 63 करोड़ कमीशनखोरी का है प्लान !

झूठ है बीजेपी का दावा, पंचायती राज अधिकारी की चिट्ठी से होता है खुलासा

11 जून 2019 को रांची के डीपीआरओ (जिला पंचायती राज पदाधिकारी) ने सभी बीडीओ को एक चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में साफ तौर से उन्होंने लिखा कि बल्ब लगाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों से प्रति बल्ब 1941.55+268.48 (GST)= 2210.03 बैंक खाते में जमा करवाना है. चिट्ठी में डीपीआरओ ने संबंधित खाते का भी जिक्र किया है जिसमें राशि जमा करनी है.

22 जुलाई को सरायकेला-खरसावां के डीपीआरओ ने जिले के सभी बीडीओ को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में साफ तौर पर लिखा गया है कि सभी पंचायत प्रतिनिधियों से एक बल्ब के एवज में 2419 रुपये का चेक संबंधित अकाउंट में जमा कराना है. यह काम जल्द से जल्द पूरा किया जाये.

आठ मार्च को झारखंड सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन निकाला गया. नोटिफिकेशन में झारखंड की पंचायतों को दुधिया रोशनी से नहलाने की बात है. सरकार की तरफ से ईईएसएल कंपनी के साथ तय हुई दर इस प्रकार है.

  • 24 वाट स्ट्रीट लाइट- 1350 रुपये
  • आर्म क्लैम और वायर- 415 रुपये
  • लगाने का चार्ज- 120 रुपये
  • मेंटेनेंस- 14.71 रुपये प्रति माह

इसे भी पढ़ें – आर्थिक मंदी की दस्तकः भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अगले पांच साल बेहद मुश्किल भरे हो सकते हैं

जानें क्या कहते हैं रांची के पंचायती राज पदाधिकारी

रांची जिले के पंचायती राज पदाधिकारी बीरेंद्र कुमार चौबे का कहना है कि अभी तक बल्ब की कीमत तय नहीं हुई है. अभी पंचायतों से प्रति बल्ब 1941.55+268.48 (GST) = 2210.03 बैंक खाते में जमा कराने को कहा गया है. विभाग ने निर्देश दिया है कि बाद में जो दर तय की जायेगी है, उस हिसाब से मुखिया के पास बिल भेजा जायेगा. मुखिया बिल का सत्यापन करेंगे. उसी हिसाब से रकम वापस पंचायत प्रतिनिधियों के खाते में चला जायेगा. 1350 रुपए प्रति बल्ब की बात सराकर की तरफ से नहीं कही गयी है. जो आदेश विभाग की तरफ से आया है, उसी के मुताबिक काम हो रहा है.

बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल ने कहा मेरे पास सरकार का नोटिफिकेशन है

पूरे मामले पर बीजेपी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करनेवाले प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव से बात की गयी. उन्होंने कहा कि एक बल्ब की कीमत 1350 ही है. इसका नोटिफिकेशन लेटर उनके पास है. बिना सबूत के बीजेपी कोई बात नहीं करती. लेकिन नोटिफिकेश मांगे जाने पर उन्होंने मना कर दिया.

इसे भी पढ़ें – 15 IAS अधिकारियों का हुआ तबादला, रांची के एसडीएम बने लोकेश मिश्रा, राहुल कुमार सिन्हा बने गिरिडीह के डीसी

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
झारखंड की बदहाली के जिम्मेदार कौन ? भाजपा, झामुमो या कांग्रेस ? अपने विचार लिखें —
झारखंड पांच साल से भाजपा की सरकार है. रघुवर दास मुख्यमंत्री हैं. वह हर रोज चुनावी सभा में लोगों से कह रहें हैं: झामुमो-कांग्रेस बताये, राज्य का विकास क्यों नहीं हुआ ?
झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन कह रहें हैं: 19 साल में 16 साल भाजपा सत्ता में रही. फिर भी राज्य का विकास क्यों नहीं हुआ ?
लिखने के लिये क्लिक करें.

you're currently offline

%d bloggers like this: