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जमशेदपुर : लाल-गुलाबी मीठी रसभरी लीची आ गयी बाजार में, मुजफ्फरपुर की शाही और रांची की स्वर्णरूपा का जवाब नहीं

Jamshedpur : शहर के बाजार में आम के साथ ही अब लीची की खुशबू भी फैल गयी है. पश्चिम बंगाल के साथ  मुजफ्फर की शाही लीची भी बाजारों में दिखाई देने लगी है. खुदरा फल विक्रेता पश्चिम बंगाल की लीची 100 रुपये प्रति किलो तक बेच रहे हैं, जबकि मुज्जफरपुर की शाही लीची 120 से 140 रुपये प्रति किलो तक मिल रही है. कुछ दिन बाद बाजार में मालदह आम भी आ जायेगा. हालांकि अभी मालदह आना शुरू हो गया है, लेकिन यह फल पूरी तरह तैयार नहीं है इसलिए इसमें भरपूर स्वाद नहीं है. करीब 10 दिन बाद मालदह की खेप आनी शुरू होगी, जिसमें भरपूर असली स्वाद और सुगंध मिलेगा.

20 मई के बाद आयेगा शाही लीची का असली मजा

फल मंडी के जानकारों का कहना है कि अभी पश्चिम बंगाल की लीची ही खाना बेहतर होगा. कारण यह है कि बंगाल की लीची पूरी तरह से तैयार है और इसमें मिठास भर गयी है. फल का आकार भी पूरी साइज में आ गया है. दूसरी ओर बिहार के मुजफ्फ्पुर की लीची का  फल पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है. अगले सप्ताह से मुजफ्फरपुर की लीची भी पूरी तरह तैयार हो जायेगी. मुजफ्फरपुर में इस साल भरपूर लीची है. इस बार 80 से 90 हजार टन लीची उत्पादन की संभावना है.  चार दिनों में शहर के बाजार में लीची की खेप बड़ी मात्रा में आने लगेगी. इसके बाद लीची की कीमत कम होने की उम्मीद है. लीची विशेषज्ञों ने बताया कि 20 मई के बाद मुजफ्फरपुर की लीची का औसत वजन 20 ग्राम से अधिक हो जाएगा. फिलहाल लीची का वजन औसत से चार ग्राम कम है. शाही लीची में मिठास और लाली तो आ गयी है, मगर फल में वजन अभी नहीं आया है.

जानिए लीची के बारे में

lychee fruit benefits | इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लीची खाएं | Patrika Newsलीची एक उष्ण कटिबंधीय फल है, जिसका मूल निवास चीन है.  लीची की पैदावार भारत के अलावा मैडागास्कर, बांग्लादेश, पाकिस्तान, दक्षिण ताइवान, उत्तरी वियतनाम, ओडिशा, फिलींपीस और दक्षिण अफ्रीका में होती है. भारत में लीची की काफी कम किस्में ही उपलब्ध हैं. इसका मुख्य कारण है कि यहां पर देरी से इसकी खेती शुरू हुई है. हालांकि पिछले कई सालों में किसानों ने लीची की कुछ प्रमुख किस्मों की खेती की है और इसकी किस्मों की पैदावार को बढ़ाने में काफी मदद की है. आइये जानते हैं लीची की कुछ प्रमुख किस्मों के बारे में.

1. कलकतिया लीची
कलकतिया लीची काफी ज्यादा देर से पकती है. इसके फल जुलाई महीने के प्रथम सप्ताह में तैयार होते हैं. इसके फल का आकार आयाताकार और औसत भार 23 ग्राम होता है. इसका छिलका मध्यम मोती के रंग का होता है. इसका फल स्वाद में मीठा और बीज आकार में बड़े होते हैं.

2. देहरादून
यह जल्दी और लगातार फल देने वाली किस्म है. पकने के बाद इसके फल जून के दूसरे सप्ताह में तोड़े जाते हैं. इसके फलों का रंग काफी आकर्षक होता है, लेकिन कई बार यह फट जाता है. देहरादून लीची के फल रसीले, नर्म, रसभरे और स्वादिष्ट होते है जो कि लोगों को काफी पसंद आते हैं.

3. शाही
यह देश की प्रमुख व्यावसायिक एवं अग्रती किस्म है, जो दिन-प्रतिदिन लोकप्रिय होती जा रही है. शाही लीची के फल गोल एवं गहरे लाल रंग के होते हैं, जो 15-30 मई तक पक जाते हैं. फल में सुगंधयुक्त गूदे की मात्रा अधिक होती है, जो इस किस्म की प्रमुख विशेषता है.

4. चाइना
यह देर से पकनेवाली लीची की किस्म है. इसके पौधे अपेक्षाकृत बौने होते है. इसके फल बड़े, शंकु आकार के तथा फटने की समस्या से मुक्त होते हैं. फलों का रंग गहरा लाल तथा गूदे की मात्रा अधिक होने के कारण इसकी अत्यधिक मांग है.

5. स्वर्ण रूपा
इस लीची का विकास रांची स्थित बागवानी एवं कृषि वानिकी शोध कार्यक्रम के गहन सर्वेक्षण एवं परीक्षण के फलस्वरूप  किया गया है, जो छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र के साथ-साथ देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त है. इस किस्म के फल मध्यम समय में पकते हैं तथा चटखन की समस्या से मुक्त होते हैं. फल आकर्षक एवं गहरे गुलाबी रंग के होते है. इसके बीज का आकार छोटा तथा गूदा अधिक स्वादिष्ट एवं मीठा होता है.

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