Jamshedpur

जमशेदपुर: घाघीडीह सेंट्रल जेल में सुरक्षाकर्मियों के 250 पद स्वीकृत, तैनात सिर्फ 60

Jamshedpur: जमशेदपुर के घाघीडीह सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले कर्मियों की भारी कमी है. हालात यह है कि घाघीडीह सेंट्रल जेल में सुरक्षाकर्मियों के करीब 250 पद स्वीकृत है, लेकिन सिर्फ 60 सुरक्षाकर्मी के भरोसे जेल की सुरक्षा व्यवस्था चल रही है.

एक ओर जहां जेल में सुरक्षाकर्मियों की कमी है. वहीं दो गुटों में अक्सर टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं. सुरक्षा में कमी इसका बड़ा कारण है. इन दिनों जेल अपराधियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर बन गया है. जेल के अंदर गैंगवार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है.

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सुरक्षा-व्यवस्था में कमी

घाघीडीह सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था में कमी के कारण जहां जेल में बंद कुख्यात अपराधी जेल से ही अपना गिरोह चला रहे हैं. जेल में रहकर भी रंगदारी की मांग कर रहे हैं.

इसके अलावा घाघीडीह सेंट्रल जेल गैंगवार का अड्डा बन भी गया है. आये दिन घाघीडीह जेल में अपराधियों के दो गुटों के बीच मारपीट होती रहती है.

बढ़ी रही गैंगवार की घटना

जमशेदपुर घाघीडीह जेल प्रशासन जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पुख्ता होने जितनी भी दावा कर ले. लेकिन जेल की सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों विफल नजर आ रही है.

25 जून को घाघीडीह जेल में अखिलेश सिंह और पंकज दुबे गैंग के बीच हुये गैंगवार की घटना जेल प्रशासन की सुरक्षा-व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी थी.

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इससे पूर्व इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं. दोनों गुटों के अपराधियों के बीच हुए गैंगवार में जहां मनोज सिंह नाम के एक कैदी मौत हो गयी. वहीं सात लोग घायल हो गये.

1900 कैदी की सुरक्षा में तैनात सिर्फ 60 कर्मी

घाघीडीह जेल में कैदियों को रखने की क्षमता 1467 है. फिलहाल केंद्रीय कारा में करीब 1900 कैदी हैं. इनमें सजायाफ्ता कैदी भी हैं. करीब 75 महिला कैदी घाघीडीह केंद्रीय कारा में बंद हैं.

सेंट्रल जेल में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं. वहीं इतने कैदी की सुरक्षा में सिर्फ 60 सुरक्षाकर्मी लगे हुए हैं. जेल में क्षमता से ज्यादा कैदी के बंद होने की वजह से उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पाती हैं.

हालात ये है कि मामूली सुविधाओं के लिये भी कई बार कैदी आपस में भीड़ जाते हैं. कई बार यह भिड़ंत खूनी संघर्ष में बदल जाता है. जेल में बंद कई कैदी गंभीर बीमारियों से ग्रसित है.

कई कुख्यात अपराधी हैं जेल में बंद

मिली जानकारी के अनुसार, घाघीडीह जेल में राज्य के कई कुख्यात अपराधी बंद हैं. इनमें गैंग्स ऑफ वासेपुर का फहीम, पलामू के विकास समेत एक दर्जन ऐसे बंदी हैं. जिनका अपने शहरों के अलावा राज्य और दूसरे राज्यों तक खौफ व वर्चस्व रहा है.

इन अपराधियों के अलग-अलग गुट हैं. याद दिला दें कि साल 2009 में जमशेदपुर के इसी घाघीडीह सेंट्रल जेल में कुख्यात अपराधी परमजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

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घाघीडीह सेंट्रल जेल में मारपीट की कुछ घटनाएं

25 जून 2019- सेंट्रल जेल में अखिलेश सिंह और पंकज दुबे गिरोह के बीच मारपीट एक कैदी मनोज सिंह की मौत हो गई और 7 कैदी घायल हुए थे.

6 मई 2019- कैदियों के दो गुटों में भिड़त, एक गुट कैदी राजा सिंह का था तो दूसरा गुड्डू गोस्वामी का. भिड़ंत के दौरान राजा सिंह ने एल्यूमिनियम के चम्मच से चाकू बना गुड्डू पर हमला कर दिया था.

23 मार्च 2019- जमशेदपुर के घाघीडीह सेंट्रल जेल में दो गुटों के बीच मारपीट होने का मामला सामने आया था. देर रात डॉन अखिलेश सिंह के शूटर हरि सिंह पर नीरज दुबे गिरोह के रोहित सिंह उर्फ पटपट और अमित मिश्रा ने जानलेवा हमला कर दिया.

जिसके बाद दो गुटों के बीच झड़प शुरू हो गयी. वहीं, दोनों गुटों के बीच में मारपीट शुरू होते ही पूरे जेल में अफरा-तफरी मच गई थी.

24 जुलाई 2016- घाघीडीह जेल में कैदियों के दो गुटों में मारपीट हुई थी. बताया जाता है कि सुलतान और शाहरूख के बीच ये मारपीट हुई थी.

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