
Rakesh Ranjan
Jamshedpur : कहते हैं-जरायम की दुनिया की राह बढ़ गए तो पीछे लौटने की सूरत नहीं बचती. इसी में जीना, इसी में मरना. यूं तो यह नौजवान अपराध का ककहरा बहुत पहले से सीख रहा था और उसके गलत रास्ते पर आगे बढ़ जाने की गवाही उसके छोटे-माेटे कारनामे देने लगे थे. लेकिन ताजा खूबखराबे के बाद बनी तस्वीर में अब उसके पीछे लौटने की सूरत नहीं दिखायी पड़ती. अब उसके लिए जेल की चहारदीवारी ही मुकम्मल ठिकाना दिख रही है. पुलिस के साथ लुकाछिपी का सिलसिला और अंतत: जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने के बाद उसे खुद की बेगुनाही साबित करने के लिए लंबा वक्त खपाना पड़ेगा. हालांकि, सबकुछ साक्ष्य पर निर्भर करेगा.
जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना इलाके में बुधवार को दिनदहाड़े जिस दुस्साहस के साथ मनप्रीतपाल सिंंह की हत्या को अंजाम दिया गया, उससे छिपा नहीं है कि इस तरह के हत्याकांड को कोई पेशेवर गिरोह ही अंजाम दे सकता है. इस हत्याकांड के बाद पुलिस की सिरदर्दी भी बढ़ चली है. शहर का सिख समाज आंदोलित है और पुलिस पर हत्या के आराेपियों की गिरफ्तारी का दबाव बना रहा है. पुलिस आक्रोश को इस आश्वासन के साथ दबाने की कोशिश कर रही है कि हत्यारोपी जल्द ही उसकी गिरफ्त में होंगे. पुलिस ने हत्या के कुछ ही देर बाद आनन-फानन में मुख्य आरोपी राहुल सिंंह के पिता कालिका सिंंह और मां को हिरासत में ले लिया. थाने के बरामदे में एक बेंच पर माथे पर चिंंता की खिंंची बड़ी लकीरों के साथ बैठे कालिका सिंंह को शायद ही इस बात का कभी गुमान रहा होगा कि ऐसे भी दिन देखने पड़ेंगे. कालिका सिंह भले पुलिस महकमे के अदना सा कर्मचारी रहे थे, लेकिन उनका खास रूआब था. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के अंगरक्षक के रूप में आम ओ खास में उनकी खास पहचान थी. हाल ही पुलिस की नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद सकून की सम्मानजनक जिंंदगी जीने की हसरत पाले कालिका सिंंह पुलिस मेंस एसोसिएशन के पदधारी भी रह चुके हैं.

अखिलेश के पिता भी रहे पुलिस अधिकारी और पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारी
छोटे-मोटे अपराध करते हुए अपराध की दुनिया का जानामाना नाम बन गए अखिलेश सिंंह और राहुल सिंंह में एक साम्य है. यही कि अखिलेश के पिता का पुलिस अधिकारी और पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारी के रूप में खास रूतबा था. सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका सामाजिक रूतबा कम नहीं हुआ है. लेकिन बेटे अखिलेश की वजह से उन्हें भी कम तनाव नहीं झेलना पड़ा. ओमप्रकाश काबरा हत्याकांड से लेकर आशीष डे हत्याकांड तक एक के बाद हत्याकांडों और अन्य प्रवृत्ति के अपराध में नाम आने पर लंबी फरारी के बाद अखिलेश जब जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा तो उसके बाद जेल आने-आने का क्रम आगे ही बढ़ने लगा. जेलर उमाशंकर पांडेय हत्याकांड सहित कई हत्याकांंडों में आजीवन कारावास की सजा के बाद स्थायी रूप से उसके दिन जेल में ही कट रहे हैं. कहते हैं कि जेल की सलाखों के पीछे से भी जमशेदपुर के अपराध की दुनिया में उसकी सरदारी चल रही है और यह भी कहा जाता है कि उसका गिरोह अपने सरदार के हर आदेश को शिद्दत से अमलीजामा पहनाता है.
पहली बार आर्म्स एक्ट में जेल गया था राहुल
कालिका सिंंह का पुत्र राहुल सिंंह छोटे-मोटे अपराध को अंजाम देने के बाद पुलिस की नजरों से बचकर रहने को मजबूर हुआ. आर्म्स एक्ट के मामले में बिहार से पुलिस की पकड़ में आने के बाद उसने पहली जेल यात्रा की. जमानत पर जेल में बाहर निकलने के बाद उसकी आपराधिक गतिविधि कुछ ज्यादा ही बढ़ गई. एग्रिको स्थित जेएच तारापोर स्कूल के पास जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय की पार्टी भारतीय जनतंत्र मोर्चा के कार्यालय पर फायरिंंग और फिर जमशेदपुर कोर्ट परिसर में गैंगस्टर अखिलेश सिंंह पर हमला के आरोपी छब्बे की पिटाई इस बात की गवाही देने लगा कि वह अब पीछे लौटने को तैयार नहीं है. मनप्रीतपाल सिंह की हत्या के बाद यह जाहिर हुआ कि अब उसके पीछे लौटने की सूरत जाती रही. बताया जाता है मनप्रीत की भी पहले राहुल से यारी थी. हत्या में जिन अन्य युवकों को शामिल बताया जा रहा है वे भी मनप्रीत के दोस्त थे. दोस्ती अदावत में तब बदली जब सीतारामडेरा थाना इलाके में एक गैस एजेंसी पर फायरिंंग की वारदात हुई. एजेंसी के संचालक का पुत्र गौरव गुप्ता भी मनप्रीत की हत्या में शामिल बताया गया है. फायरिंंग मामले में मनप्रीत जेल गया. जमानत पर बाहर आने के बाद वह शहर के बाहर चला गया और अंतत: उसकी हत्या हो गई.




