
Jamshedpur : केबुल कंपनी (इंकैब) पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. सुप्रीम कोर्ट ने कमला मिल्स की अपील को निरस्त कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मजदूरों की बड़ी जीत माना जा रहा है. मजदूरों की ओर से लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने सर्वोच्च न्यायालय का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि बैंक अपने एनपीए (अनर्जक अस्तियों) को प्राइवेट कंपनियों को नहीं बेच सकते हैं, क्योंकि ऐसा कोई कानून इस देश में नहीं है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अखिलेश से कहा कि एनसीएलएटी ने इस मसले को खुला रखा है. इसलिए आप इसे एनसीएलटी कोलकाता में उठा सकते हैं, क्योंकि आपने यहां अपील दायर नहीं की है.उच्चतम न्यायालय में सोमवार को कमला मिल्स द्वारा दायर अपील संख्या 2278-2279/2021 की सुनवाई न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ में पूरी हो गई.
गोवानी को पक्षकार नहीं बनाया गया – मुकुल रोहतगी
कार्यवाही की शुरुआत पूर्व अटॉर्नी जनरल रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने की. वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि एनसीएलएटी ने गोवानी की स्थिति की पूरी तरह से अवहेलना की है और उनके त्यागपत्र दिनांक 20.11.2010 के आधार पर, यह गलत समझा गया है कि गोवानी मई 2009 से इंकैब के निदेशक थे. इस तरह अपीलकर्ता गोवानी इंकैब के संबंधित पक्ष हैं. इस गलत धारणा के परिणामस्वरूप एनसीएलएटी द्वारा गलत निर्णय पारित किया गया है. दिवालियापन संहिता- 2016 की धारा 33 के अनुसार कॉर्पोरेट देनदार के परिसमापन के साथ आगे बढ़ने के सीओसी के निर्णय को रद्द कर दिया गया है और उसे पुनर्गठित करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें कमला मिल्स लिमिटेड और फास्क्वा इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड लिमिटेड आदेशानुसार शामिल नहीं किये जा सकते. अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने आगे कहा कि एनसीएलएटी को गोवानी को उनके खिलाफ निर्णय लेने से पहले अपील की कार्यवाही में उन्हें पक्षकार बनाना चाहिए था. गोवानी को अपील में पक्षकार के रूप में नहीं पेश करना और उनके कथित इस्तीफे के पत्र के आधार पर विवादित निर्णय पारित करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है. रोहतगी ने कहा कि विवादित निर्णय के. शशिधर बनाम इंडियन ओवरसीज बैंक और अन्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णयों के संदर्भ में कानून की स्थापित स्थिति के पूर्ण उल्लंघन में पारित किया गया है.
21 करोड़ देनदारी को 2339 करोड़ बताया – श्रीवास्तव
इस पर जमशेदपुर के मजदूरों का प्रतिनिधित्व कर रहे भगवती सिंह के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने अदालत से कहा कि रमेश घमंडीराम और शशि अग्रवाल पर बेहद संगीन आरोप हैं. उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित इंकैब की कुल 21.63 करोड़ की देनदारियों को बढ़ाकर अविश्वसनीय रूप से 2339 करोड़ रुपये कर दिया. अखिलेश ने बताया कि मेसर्स लीडर यूनिवर्सल (मॉरीशस) कंपनी लिमिटेड, जिसके पास कॉर्पोरेट देनदारी में 51 फीसदी शेयर हैं, ने खातों और पुस्तकों के रखरखाव, वैधानिक रिकॉर्ड, बैलेंस शीट तैयार करना, बैलेंस शीट्स का सालाना ऑडिट कराना, एजीएम बुलाना, शेयरधारकों को ऑडिटेड बैंलेंस सीट भेजना और उसे एजीएम में स्वीकृत कराना, निदेशक और ऑडिटर नियुक्त करना आदि जो कंपनी कानून के तहत अनिवार्य कानूनी जिम्मेदारियां हैं, को 2000 के बाद बातिल कर दिया और 8 वर्षों से अधिक के लिए हाइबरनेशन में चला गया और अचानक जैसा कि तथ्यों और परिस्थितियों से प्रतीत होता है कि 22/09/2008 को अवैध रूप से एमबी शाह, वाईआर कोरी और केएन अमरिया, जो सभी रमेश घमंडीराम गोवानी के आदमी हैं, को इंकैब का नया निदेशक बना दिया. उन्होंने अदालत को आगे बताया कि जबकि मेसर्स लीडर यूनिवर्सल (मॉरीशस) कंपनी लिमिटेड के सभी निदेशक कानूनी रूप से कंपनी कानून, 1956 की धाराएं 274 (1) (g) और 283 (1)(g) के तहत अयोग्य थे और वे किसी को निदेशक नहीं बना सकते थे. इन तीन नये निदेशकों के द्वारा और बाद में बीएफआईआर की रजिस्ट्री द्वारा भेजे गये एक फर्जी फैक्स के आधार पर गोवानी ने खुद को इंकैब का निदेशक बनाया और इंकैब पर काबिज हो गया.
अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस रूप में ये तीनों कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 5 और कंपनी अधिनियम, 2013 की धाराएं 2 (59) और 2 (60) के तहत कानूनी और वास्तविक रूप से इंकैब के निदेशक हैं. इस तरह इन्हें लेनदारों की कमेटी में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं था. अखिलेश ने न्यायालय को बताया कि यह आश्नचर्यजनक है कि न तो बीआईएफआर और न ही न्याय निर्णायक प्राधिकारी, यानी एनसीएलटी ने इंकैब की अचल और चल संपत्तियों के बल पर इंकैब के पुनरुद्धार की संभावना का पता लगाया जो इसके पुनरुद्धार के लिए पर्याप्त थे.जमशेदपुर के कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, अवनीश सिन्हा, संजीव महंती, आकाश शर्मा और मंजरी सिन्हा ने हिस्सा लिया. कोलकाता के कर्मचारियों के तरफ से ऋषभ बनर्जी और कमला मिल्स की तरफ से अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और रूद्रेश्वर सिंह ने अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लिया.
इसे भी पढ़ें – सरायकेला : आग तापने के दौरान अचेत होकर गिरी महिला गंभीर रूप से झुलसी




