
Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास और सरकार के विभागों के मंत्री और सचिवों को अनियमितताओं पर हमेशा चिट्ठी लिखकर अलर्ट करनेवाले सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने इस बार सरकार के मुख्य सचिव को एक खत लिखा है. हर बार की तरह इस बार भी खत में जिक्र है विभाग की अनियमितता की. लेकिन, इस बार मंत्री सरयू राय की भाषा काफी कड़ी है. खत में लिखे वाक्यों पर गौर करें, तो ऐसा लगता है कि जैसे मंत्री सरयू राय कह रहे हैं कि इस सरकार में चाहे जितने भी खत विभाग और मंत्री या सचिवों को लिख लिये जायें, विभाग अनियमितता करना नहीं छोड़ेंगे.
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दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए
मंत्री सरयू राय ने मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को लिखे पत्र में कहा है कि ऐसा लगता है, जैसे झारखंड सरकार के विभागों ने अनियमितताएं करने की कसम खा ली है. सरयू राय ने लिखा है, “मैं भवन निर्माण विभाग के सचिव को भेजे गये पत्र का उल्लेख करना चाहता हूं. भवन निर्माण विभाग के स्तर से की जानेवाली जीर्णोद्धार योजनाओं की कम-से-कम सीमा तीन करोड़ की है. इस सीमा से ऊपर की योजनाएं को ही भवन निर्माण विभाग कर सकता है. लेकिन, सीमा से कम लागतवाली योजनाओं को भी भवन निर्माण विभाग करने पर उतारू है. सचिव भवन निर्माण विभाग ने ऐसी पांच योजनाओं की निविदा निकाली थी, जिसकी सीमा तीन करोड़ रुपये से कम की है. भवन विभाग को मेरी तरफ से इस बाबत लिखने पर विभाग ने सभी निविदाओं को रद्द कर दिया था. लेकिन, बाद में फिर से उनमें से दो योजनाओं के लिए विभाग की तरफ से निविदा निकाली गयी.” मंत्री ने आगे लिखते हुए कहा है कि भवन निर्माण विभाग को अपनी ऐसी कारगुजारियों पर रोक लगानी चाहिए और इसके लिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. आगे उन्होंने बताया कि योजनाओं का क्रियान्वयन भवन निर्माण विभाग की तरफ से किये जाने पर जितनी लागत होती है, उससे सात फीसदी अधिक लागत आती है. ऐसे में इन योजनाओं से राजकोष पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है.
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सरकार में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए संजीदगी का अभाव है
खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने आगे लिखते हुए कहा है कि सचिव पथ निर्माण विभाग को जो चिट्ठी 28 मार्च और 26 जुलाई को लिखी है, उसके मिलने तक की सूचना विभाग ने नहीं दी है, कार्रवाई की बात तो काफी दूर है. आगे लिखते हुए मंत्री सरयू राय ने कहा है कि ये बातें घोर आपत्तिजनक हैं. उन्होंने आगे लिखा है कि विभाग के सचिव, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री आदि को लिखे गये ऐसे पत्र के आधार पर की गयी कार्रवाई या पत्रों की प्राप्ति-स्वीकृति की जानकारी न देना गंभीर विषय है. उजागर की गयी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई नहीं होने से ऐसा लगता है, जैसे सरकार में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने के बारे में आवश्यक संजीदगी का अभाव है. उन्होंने सीएस से ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई की उम्मीद की है.
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को-ऑर्डिनेशन में कमी न आये, इसलिए करना पड़ा ऐसा : भवन निर्माण सचिव
इधर, भवन निर्माण विभाग के सचिव सुनील कुमार का कहना है, “मंत्री जी की चिट्ठी में पुरानी योजनाओं की बात है. को-ऑर्डिनेशन में दिक्कत आने की वजह से विभाग ने ऐसा निर्णय लिया. इससे पहले विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस मसले को लेकर चर्चा हुई थी. एजेंसी का कहना था कि एक योजना कहीं और की हो जाती है और दूसरी योजना कहीं और की, जिस वजह से को-ऑर्डिनेशन में कमी आती है. हायर एजुकेशन विभाग की योजना में दिक्कत आ रही थी. बैठक के बाद पदेन सचिव ने यह निर्णय लिया कि को-ऑर्डिनेशन के लिए काम विभाग या निगम करे.”




