
NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट द्वारा सबरीमला मंदिर पर फैसला दिये जाने के बाद से केरल में राजनीति गरमा गयी है. भाजपा इस फैसले को केरल में जनाधार को मजबूत करने का मुफीद अवसर मानकर चल रही है. इस बात पर विचार करते हुए भाजपा आलाकमान ने सबरीमला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का खुलकर विरोध किया है. भाजपा ने केरल में 10 से 50 उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को बरकरार रखने को लेकर अभियान छेड़ रखा है. जानकारी के अनुसार भाजपा ने आठ से 13 नवंबर राम मंदिर की तर्ज पर रथयात्रा निकालने की घोषणा कर दी है. बता दें कि सबरीमला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर केरल भाजपा इकाई काफी गंभीर है. पार्टी नेतृत्व द्वारा हरी झंडी दिये जाने के बाद भाजपा प्रदेश इकाई ने राम मंदिर की तर्ज पर जनाधार मजबूत करने के लिए छह दिवसीय रथयात्रा निकालने की योजना तैयार की है. यात्रा का नेतृत्व भाजपा प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पीएस श्रीधरण पिल्लई और सहयोगी पार्टी भारत धर्म जन सेना के अध्यक्ष और हिंदू इझावा समुदाय के नेता के नातेसन के पुत्र थूशर वेल्लप्पली करेंगे.
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सबरीमाला मुद्दे पर भाजपा केरल में जनाधार बढ़ाने चाहती है
रथयात्रा निकालने का मकसद केरल में हिंदू मतों सहित ईसाईयों और मुसलमानों का समर्थन हासिल करना है. यात्रा की शुरुआत आठ नवंबर को कासरगोड जिले के मधुर मंदिर से होगी. रथयात्रा 13 नवंबर को सबरीमला बेस स्टेशन एरुमेली पर समाप्त हो जायेगी. बता दें कि इस दिन सुप्रीम कोर्ट में सबरीमला मुद्दे को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई होगी. सबरीमाला मुद्दे पर भाजपा केरल में जनाधार बढ़ाने चाहती है. छह दिवसीय यात्रा में पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के कई नेता शामिल होंगे. यात्रा के दौरान भाजपा नेता 52 ईसाई संस्थानों के प्रमुखों और 12 इस्लामी केंद्रों के प्रमुखों से मिलकर उनका समर्थन और सहयोग हासिल करेंगे. उन्होंने कहा कि केरल में नास़्तिकता में विश्वास करने वाली सरकार है. कहा कि वामपंथी सरकार सबरीमला मंदिर की पवित्रता को नष्ट करने पर उतारू है. यात्रा में हिंदू धर्मगुरुओं को भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. भाजपा नेताओं के अनुसार यात्रा एनडीए के बैनर तले निकाली जायेगी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कई हिदू और सामुदायिक संगठनों ने यात्रा को समर्थन देने की घोषणा की है.
खबरों के अनुसार वामपंथी नेताओं के परिवारों की महिलाओं ने भी भाजपा के इस प्रयास का समर्थन किया है. बता दें कि भाजपा की इस योजना से केरल सरकार सकते में है. सत्तारूढ़ वाम डेमोक्रेटिक फ्रंट के संयोजक और सीपीआई-एम केंद्रीय समिति के सदस्य ए विजय राघवन ने आरोप लगाया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हर कीमत पर प्रदेश में दंगा फैसला चाहते हैं. भाजपा राम मंदिर की तरह केरल में भी सांप्रदायियकता केा बढावा देकर लोगों का ध्रुवीकरण करना चाहती है.




