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कैसे होगा शहरी विकास: सात सालों से निकायों में पद सृजित नहीं, छह नये नगर पंचायतों, निगमों में भी कर्मियों की कमी

Nikhil kumar

Ranchi : झारखंड में सात सालों से शहरी नगर निकायों में पदों का सृजन नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान छह नये नगर पंचायतों का गठन भी किया गया है. राज्य में 21 मई 2010 और 22 जून 2017 को अंतिम बार 43 शहरी निकायों के लिए पदों का सृजन किया गया था. इस तिथि के पश्चात अब तक छह नये नगर निकायों हरिहरगंज, बरहरवा, महागामा, डोमचांच, बड़कीसरैया तथा धनवार को नगर पंचायत के रूप में गठित किया गया है. इन नगर निकायों के लिए पदों का सृजन अब तक नहीं होने की वजह से निकायों के कार्य व शहरी विकास की योजनाएं पूरी तरह से प्रभावित हो गयी हैं. पदों की कमी सिर्फ निकाय स्तर पर ही नहीं, बल्कि नगर निगमों में भी है. इस वजह से निगमों की भी स्थिति अच्छी नहीं है. टाउन प्लानिंग का भी काम सारा ठप है.

पांच नगर निगम में नगर आयुक्त नहीं

राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग अंतर्गत कुल पांच नगर निगमों गिरिडीह नगर निगम, हजारीबाग नगर निगम, चास नगर निगम, आदित्यपुर नगर निगम एवं मेदिनीनगर नगर निगम में नगर आयुक्त का पद अब तक सृजित नहीं है. इसके साथ ही दो नगर निगमों गिरिडीह नगर निगम एवं मेदिनीनगर नगर निगम में अपर नगर आयुक्त का पद सृजित नहीं है. इसके अलावा इन दो नगर निगमों में सहायक नगर आयुक्त के सृजित पदों में अन्य निगमों के साथ समरूपता नहीं है. निकायों में पद सृजित नहीं होने की वजह से शहरी विकास की लगभग सभी योजनाएं प्रभावित हैं. योजनाओं की मॉनिटरिगंग से लेकर स्वीकृति इत्यादि संविदा आधारित कर्मियों द्वारा की जा रही है.

ये पद अब तक सृजित नहीं, बहाली भी नहीं हो सकी

राज्य में पांच नगर आयुक्त, दो अपर नगर आयुक्त सहित छह स्थानीय नगर निकायों में बड़े पैमाने पर रिक्तियां हैं. नगरपालिका सेवा संवर्ग के तहत पदों का सृजन किया जाना है. इनमें कार्यपालक पदाधिकारी के साथ-साथ सहायक अभियंता, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता व कनीय अभियंता विद्युत, स्ट्रीट लाइट इंस्पेक्टर, सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी, सेनेटरी एंड फूड इंस्पेक्टर, सेनेटरी सुपरवाइजर, सहायक राजस्व पदाधिकारी, राजस्व निरिक्षक, निम्नवर्गीय लिपिक, गार्डन अधीक्षक, विधि सहायक, प्रशाखा पदाधिकारी, भू-संपदा पदाधिकारी, टाउन प्लानिंग विंग में सहायक नगर निवेशक, सीएंडी, जीआईएस ऑपरेटर इत्यादि पद हैं जिनका सृजन नहीं हो पाया है. पद सृजित नहीं होने की वजह से नियमित बहाली नहीं की जा सकी है.

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