
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगर ईडी चाईबासा में मनरेगा घोटाले मामले के अनुसंधान से संबंधित दस्तावेज की प्रतिलिपि की मांग करती है तो उसे उपलब्ध कराए. इससे पहले ईडी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले में कई केस में एंटी करप्शन ब्यूरो( एसीबी ) ने आरोप पत्र दिए दाखिल कर दिया है, लेकिन आरोप पत्र की प्रतिलिपि मांगे जाने पर राज्य सरकार द्वारा ईडी को मुहैया नहीं कराया जा रहा है, जिस पर कोर्ट ने सरकार को ईडी द्वारा मांगे जाने वाले दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए कहा कि ईडी चाहे तो संबंधित कोर्ट से आरोप पत्र की सर्टिफाइड कॉपी भी निकाल सकती है.
सरकार ने दाखिल किया स्टेटस रिपोर्ट
इससे पहले राज्य सरकार की ओर से मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर बताया गया कि एसीबी ने मामले में 14 प्राथमिकी दर्ज की है, इनमें से 10 केस में आरोप पत्र दाखिल हो चुका है. जबकि चार केस में अभी अनुसंधान चल रहा है. चाईबासा में मनरेगा घोटाला कि सीबीआई जांच को लेकर मतलूब आलम की जनहित याचिका की सुनवाई मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार के स्टेटस रिपोर्ट पर सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की. राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन एवं अधिवक्ता पियूष चित्रेश ने पैरवी की. वही प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार ने पैरवी की.
दरअसल पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एसीबी में दर्ज 14 एफआईआर के संबंध में सरकार से पूछा था कि इन केस की वर्तमान में जांच की क्या स्थिति है। इस पर सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी गई थी। जिसे सरकार की ओर से मंगलवार को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था.
क्या है मामला
प्रार्थी की ओर से की ओर से कोर्ट को बताया गया था वित्तीय वर्ष 2008-9, 2009-10, 2010-11 में चाईबासा में करीब 28 करोड़ रुपए का मनरेगा घोटाला हुआ है। इसे लेकर चाईबासा में पुलिस ने 14 एफआईआर दर्ज की थी। बाद में एसीबी ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था , लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। चाईबासा में उक्त 3 वित्तीय वर्षों में मनरेगा कार्यों में अग्रिम राशि का भुगतान तो कर दिया गया था लेकिन कोई काम धरातल पर नहीं हुआ था। उस समय चाईबासा के डीसी के श्रीनिवासन थे.
बता दें कि चाईबासा में मनरेगा में घोटाला की जांच को लेकर प्रार्थी ने वर्ष 2013 में जनहित याचिका दाखिल की थी, बाद में कोर्ट ने इस मामले को निष्पादित कर दिया था। इसके बाद में प्रार्थी की ओर से वर्ष 2021 में फिर से जनहित याचिका दाखिल कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है.




