
Ranchi. पीडीएस राशन वितरण में भ्रष्टाचार के किस्से सामने आते रहते हैं. पर कोरोना त्रासदी के बीच जरूरतमंदों को राशन के लिये भटकना गंभीर सवाल खड़े करता है. मामला गढ़वा के बड़गड़ ब्लॉक के गांव बिन्जपुर से सामने आया है. यहां दो ऐसे मामले सामने आये हैं जहां तकरीबन एक साल से मृत कार्डधारियों के नाम पर राशन डीलर नियमित राशन का उठाव कर कालाबाजारी कर रहे हैं. वहीं जिंदा कार्डधारी के नाम पर राशन का उठाव हो रहा है पर वास्तव में लाभुक को अनाज नहीं मिल रहा.
अप्रैल से अनाज उठा रहे मुर्दे
ग्रामीणों के अनुसार सिबन मिंज नामक पीएच कार्ड धारक (कार्ड सं. 20200020679) की अप्रैल 2020 में ही मौत हो गयी थी. इसी तरह से जगमनिया देवी, अन्त्योदय अन्न योजना कार्ड धारक (कार्ड सं. 202000206792) की मृत्यु अगस्त 2020 में हो चुकी है. इसके बावजूद दोनों कार्डों के माध्यम से डीलर नियमित राशन का उठाव कर रहे हैं. पर दूसरी ओर अन्तोनिया टोप्पो (कार्ड सं0 202000206790) के नाम से अन्त्योदय कार्ड बना है.
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पर उसे कभी राशन मुहैया नहीं कराया गया. उनके परिवार में 4 सदस्य हैं. पीएच कार्डधारी जसिन्ता कच्छप (कार्ड सं0 202007398912) को इस साल के मार्च महीने से राशन नहीं दी जा रही है. हिरमानिया देवी (कार्ड सं0 202000206840) को जनवरी 2021 से राशन नहीं दी जा रही है जबकि इनके नाम से नियमित राशन का उठाव जारी है.
खाद्य आयोग से शिकायत
डीलरों की मनमानी से परेशान 18 कार्डधारियों ने पिछले साल राज्य खाद्य आयोग में शिकायत दर्ज की थी. इसके बाद सभी जरूरतमंद लाभुकों को बकाया अनाज देना पड़ा था. इसके बाद इन लाभुकों ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अपना डीलर ही बदल लिया.
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अब बिन्जपुर गांव में राशन उठाव में आ रही समस्याओं को देखते हुए बीडीओ बिपिन भारती ने संज्ञान लिया है. न्यूजविंग से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे रविवार को ही इस मामले की वास्तविकता को परखने का प्रयास करेंगे. पूर्व में लोग अंगूठा लगाकर राशन का उठाव करते थे. अब ओटीपी का मसला है. इसी पर संभवतः कुछ मसला खड़ा होने से शिकायत आयी हो. वे शीघ्र ही लाभुकों के हित में इसे दूर करने का प्रयास करेंगे.
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क्या है कानूनी प्रावधान
झारखंड सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2019 के प्रावधानों के अनुसार पीडीएस डीलर यदि उपभोक्ताओं को खाद्यान्न आदि उपलब्ध नहीं कराते हों, खाद्यान्न आदि की कालाबाजारी में संलिप्त हों अथवा मृत कार्डधारकों की सूचना सक्षम प्राधिकार को उपलब्ध नहीं कराते हों तो उनकी अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) रद्द की जा सकती है. इतना ही नहीं, कोरोना आपदा के समय (आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005) आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध राहत संसाधनों का दुरुपयोग करने पर उसके दोषी साबित होने पर पर 2 साल की सजा हो सकती है.




