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ILFS संकटः कर्ज देनेवाली कंपनियों को नहीं मिल रहा पैसा

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  • झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स इंप्लीमेंटेशन कंपनी लिमिटेड, निवेशकों को नहीं चुका रही 76 करोड़
  • अक्टूबर 2018 में केंद्र सरकार ने आइएलएफएस के निदेशक मंडल को कर दिया था भंग

Ranchi: सरकार और इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फायनांशियल कंपनी (आइएलएफएस) का स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स इंप्लीमेंटेशन कंपनी अपने निवेशकों को पैसे का भुगतान नहीं कर रही है. कंपनी की तरफ से 76 करोड़ रुपये का भुगतान निवेशकों को नहीं किया गया. आइएलएफएस की एसपीवी की तरफ से भुगतान नहीं किये जाने से जारी किये गये बॉन्ड पर भी असर पड़ रहा है. झारखंड की सड़क परियोजनाओं पर अब इसका प्रत्यक्ष असर भी जल्द दिखेगा.

नेशनल कंपनी लॉ बोर्ड में भी इसको लेकर निवेशकों की तरफ से शिकायत की गयी है. इसमें कहा गया है कि एसपीवी कंपनी की पैरेंट कंपनी को देनदारियों और उत्तरदायित्व का हिसाब-किताब रखना चाहिए. एसपीवी कंपनी को होल्डिंग कंपनी से अलग रखा जाना चाहिए. झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स की तरफ से राज्य के पथों का निर्माण, रख-रखाव किया जाता रहा है. निवेशकों को पैसे नहीं दिये जाने से क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने भी झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स की रेटिंग को घटा दिया है.

345 करोड़ का लिक्विड फंड होने का दावा करती है ILFS

आइएलएफएस की तरफ से झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स इंप्लीमेंटेशन कंपनी के लिए 345 करोड़ का लिक्विड (तरल) फंड होने का दावा किया जाता है. यह कंपनी के पुर्नभुगतान (रीपेमेंट) की क्षमता से 4.50 गुना अधिक है. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की तरफ से यह बात कही जा रही है कि झारखंड रोड प्रोजेक्ट्स का 500 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड में भी लगाया गया है. यह पैसा छह योजनाओं में लगाया गया है. यह कंपनी की कुल परिसंपत्ति की तुलना में अधिक है.

रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में एसपीवी व्यवस्था को बताया है गलत

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भारतीय रिजर्व बैंक की वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट एसेट्स सिक्युरिटाइजेशन में एसपीवी मॉडल को गलत बताया गया है. रिजर्व बैंक ने कहा है कि एसपीवी व्यवस्था कंगाल बनने का मॉडल है. भारतीय बैंकों में 2017-18 में कर्ज की राशि 8.9 लाख करोड़ रुपये है. यह देश की अर्थव्यवस्था को लेकर कई बातें कहता है. ऐसे में आइएलएफएस का घोटाला सरकार को सकते में ला दिया है.

अक्तूबर 2018 में भंग हुआ था निदेशक मंडल

केंद्र सरकार ने आइएलएफएस की चरमराती व्यवस्था को लेकर अक्तूबर 2018 में निदेशक मंडल को भंग कर दिया था. केंद्र सरकार ने कंपनी प्रबंधन के अधिकतर कामों को अपने अधीन कर लिया था. अक्टूबर 2018 तक आइएलएफएस 91 हजार करोड़ की डिफॉल्टर कंपनी बन चुकी थी. ऐसा कंपनी की तरफ से कर्ज नहीं चुकाने और वित्तीय संस्थानों से लिये गये पैसे की पुनर्वापसी को लेकर हुआ था. आइएलएफएस से 340 सहयोगी कंपनी जुड़ी हुई हैं, जो कंपनी की अनुषंगी इकाईयां और एसपीवी की तरह काम कर रही हैं. कंपनी के एसपीवी भी 60 हजार करोड़ रुपये का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं.

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