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जरूरत होगी तो करेंगे शिक्षकों की नियुक्ति, पैसा बर्बाद नहीं करेंगे : अशोक चौधरी

वोकेशनल कोर्स में शिक्षकों को नियुक्त कर पैसा बर्बाद नहीं करना चाहती विवि

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Ranchi : वोकेशनल कोर्स के नाम पर राज्य में सिर्फ खानापूर्ति की जाती है. बेहतर भविष्य और नौकरी के चक्कर में आकर विद्यार्थी वोकेशनल कोर्स करना चाहते हैं. लेकिन इसके बाद भी उन्हें बेरोजगारों की पंक्ति में खड़ा होना पड़ता है. रांची यूनिवसिर्टी अंर्तगत चलने वाली वोकेशनल कोर्सेज की स्थिति काफी दयनीय है. यहां कॉलेजों में विद्यार्थियों का नामाकंन तो ले लिया जाता है, लेकिन शिक्षकों के स्थान को नहीं भरा जाता है. इस बारे में जब रांची विवि वोकेशनल कोर्स निदेशक अशोक चौधरी से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि जरूरत होगी तो करेंगे शिक्षकों की नियुक्ति पैसा बर्बाद नहीं करेंगे. ऐसे में हमारे राज्य के युवा कैसे व्यवसायिक कोर्सों में अपना नाम कर पायेंगे. जबकि इन वोकेशनल कोर्स के लिये विवि की ओर से अन्य विषयों की अपेक्षा अधिक फीस ली जाती है. जैसे बीबीए तीन साल में 8,500, एमबीए दो साल में 25,000, बीसीए तीन साल में 8,500, एमसीए दो साल में 25,000 इसी तरह अन्य विषयों में लिया जाता है. फिर भी इन विषयों में शिक्षकों की कमी देखी जाती है.

डेढ़ माह पहले निकली सूची अब तक नहीं मिला कॉलेज

रांची यूनिवर्सिटी की ओर से डेढ़ माह पहले वोकेशनल कोर्स के लिये संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिये सूची निकाली गयी. लेकिन डेढ़ माह हो जाने के बाद भी विवि की ओर से इन शिक्षकों को कॉलेज नहीं दिया गया है. सूची में जिन उम्मीदवारों के नाम है उन्होंने कई बार इस विषय में विवि से सवाल तलब किया, लेकिन हर बार उम्मीदवारों को यहीं जवाब मिलता है कि प्रक्रिया में समय लगेगा.

95 उम्मीदवार हैं सूचीबद्ध

साक्षात्कार में 95 उम्मीदवारों के नाम है. जिन्होंने साक्षात्कार पास किया है. वोकेशनल कोर्स के लिये इन उम्मीदवारों को उक्त विषय में मास्टर डिग्री होना चाहिये. इन उम्मीदवारों में से कई ऐसे भी है जो पूर्व से ही कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं वो भी मात्र दस से बीस हजार तक की पगार में. जबकि इनकी नियुक्ति हो जाने पर इन्हें 36,000 तक की तनखा मिलेगी.

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जरूरत के अनुसार होगी नियुक्ति

इस विषय में जब रांची विवि वोकेशनल कोर्स निदेशक अशोक चौधरी से बात की गयी तो उन्होंने जानकारी दी कि सूची जारी कर दी गयी है. संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति कॉलेजों की जरूरत और विद्यार्थियों के अनुसार की जायेगी. सरकारी पैसे का किसी भी तरह से दुरुपयोग नहीं किया जायेगा. वर्तमान में नामांकन चल रहा है. नामाकंन पूरी होते ही कॉलेजो में विद्यार्थियों के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी. इन्होंने बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति 11 माह के लिये किया जायेगा, क्योंकि एक सत्र 11 माह का होता है. ऐसे में 11 माह बाद फिर से कोर्स के लिये शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों को झेलनी पड़ेगी.

नहीं है अच्छी स्थिति

राज्य में वोकेशनल कोर्स की बात की जाए तो स्थिति काफी दयनीय है. यहां के विद्यार्थी अन्य राज्यों के अपेक्षा ना तो अच्छा नाम काम पाते हैं और ना पैसा कमा पाते हैं. इसका मुख्य कारण विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और संसाधनों की कमी है. लेकिन फिर भी विवि की ओर से लगातार छात्र हितों पर लीपापोती की जाती है.

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