न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

CM के विभाग में आरोपी अफसरों की लंबी लिस्ट, 68 IFS पर गंभीर आरोप, मांस की खरीद में भी खाया कमिशन, एक फरार घोषित

हाथी दांत तस्करी, आरा मिल को अवैध लाइसेंस देना, कैंपा और जमीन घोटाला के हैं गंभीर आरोप, सीएम का आदेश भी नहीं मानता विभाग

1,591

Ravi Bharti / Pravin Kumar

Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास के अधीन वन विभाग में आरोपी अफसरों की लिस्ट लंबी होती जा रही है. आधे से अधिक अफसरों पर गंभीर आरोप हैं. सभी पर विभागीय कार्यवाही भी चल रही है. कई अफसर सेवानिवृत भी हो गये. लेकिन अब तक जिन अफसरों पर गंभीर आरोप लगा है, उनपर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती ही की गई. दो सप्ताह पहले मुख्यमंत्री ने जनसंवाद में हजारीबाग में पदस्थापित आईएफएस अफसर राजीव रंजन को हटाने का आदेश दिया था, अब तक उस पर भी कार्रवाई नहीं हुई. इसमें 1600 एकड़ जमीन गायब का होने का आरोप है. इसमें एक आईएफएस अफसर वी जयराम फरार घोषित कर दिये गये हैं.

इसे भी पढ़ेंःपथ विभाग की 5000 करोड़ की योजनाओं पर ब्रेक, बोकारो एक्सप्रेस हाइवे पर भी ग्रहण

100 करोड़ से भी अधिक की अनियमितता

वन विभाग में 68 आईएफएस अफसरों ने 100 करोड़ से भी अधिक की अनियमितता की है. इसमें प्रमुख रूप से हाथी दांत और जानवरों की खाल की तस्करी में सहयोग करने, अवैध आरा मिल को लाइसेंस देने, जंगल की जमीन बेचन, कैंपा फंड में घोटाला करने, एफडीए में सरकारी राशि का गबन,सोलर लैंप में घोटाला, सागवान-खैर की लकड़ी बेचने जैसे गंभीर आरोप हैं. इस पर कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ लीपापोती ही हुई है.

इसे भी पढ़ें : पुलिस महकमे के एक खास वर्ग का नौकरशाही में वर्चस्व, राष्ट्रपति से शिकायत

जैविक उद्यान में मांस की खरीद में भी सरकारी राशि का गबन

आईएफएस अफसरों ने जानवरों का भी हक मारने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. जानवरों के दिये जाने वाले मांस में भी कमिशन खाया. मांस की खरीद अन्य उद्यानों की तुलना में अधिक दर पर की. इस पर भी विभाग ने लीपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया. जैविक उद्यान में बाघ को प्रतिदिन आठ किलोग्राम, शेर को प्रतिदिन 10 किलोग्राम, तेंदुआ को प्रतिदिन छह किलोग्राम, लकड़बग्घा को प्रतिदिन चार किलोग्राम, गरूड़ को प्रतिदिन एक किलोग्राम मांस दिया जाता है. वहीं घड़ियाल को प्रतिदिन पांच किलोग्राम मछली व मुर्गा दिया जाता है.

इसे भी पढ़ें : IAS, IPS और टेक्नोक्रेटस छोड़ गये झारखंड, साथ ले गये विभाग का सोफासेट, लैपटॉप, मोबाइल,सिमकार्ड और आईपैड

palamu_12

अभियोजन की स्वीकृति भी मांगी गई

बिहार सरकार ने झारखंड कैडर के तीन आईएफएस अफसरों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी. इसके बावजूद राज्य सरकार ने अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी. एकीकृत बिहार के समय इन अफसरों पर कई गंभीर आरोप थे. इन अफसरों में बीसी निगम, सर्वेश सिंघल और महेंद्र कर्दम शामिल हैं. इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.

इन प्रमुख अफसरों पर क्या है आरोप

  • धीरेंद्र कुमार : झारक्राफ्ट के पूर्व एमडी: हाथी दांत तस्करी का आरोप
  • प्रदीप कुमार : पूर्व पीसीसीएफ- मांस खरीद में अनियमितता का आरोप
  • सीपी खंडूजा : अवैध आरा मिल को लाइसेंस देने का आरोप
  • प्रदीप कुमार : जंगल की जमीन बेचने का आरोप
  • बीएन द्विवेदी : राशि गबन का आरोप
  • आरके सिन्हा : राशि गबन का आरोप
  • सत्यजीत सिंह : सागवान और खैर की लकड़ी बेचने का आरोप
  • केएन ठाकुर : सरकारी वाहन बेचने का आरोप
  • कुमार आशुतोष : एफडीए में सरकारी राशि के गबन का आरोप
  • अजीत कुमार सिंह : कैंपा फंड में घोटाला का आरोप
  • नागेंद्र बैठा : कैंपा फंड में घोटाला का आरोप
  • यूएन विश्वास : कुनकी हाथी लाने में अनियमितता का आरोप
  • रवि रंजन : सरकारी राशि के गबन का आरोप

इसे भी पढ़ें : घुटन में माइनॉरटी IAS ! सरकार पर आरोप- धर्म देखकर साइड किए जाते हैं अधिकारी

इन अफसरों पर भी हैं गंभीर आरोप

  • बीसी निगम
  • सर्वेश सिंगल
  • महेंद्र कदर्म
  • पीसी मिश्र
  • अरविंद कुमार
  • नरेंद्र मिश्र
  • एके प्रभाकर
  • बलराम खालखो
  • शिवाशिस राम
  • वी जयराम

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

%d bloggers like this: