
Avinash, Jamshedpur: यह भी इत्तफाक है कि जिस दिन मां सरस्वती का विसर्जन हो रहा है, उस रोज लता जी हमें छोड़ कर चली गई. सरस्वती पुत्री स्वर कोकिला लता मंगेशकर की मौत की खबर आते ही शोक की लहर फैल गई. हर कोई इस खबर से बेहद आहत दिखा. पूरा सोशल मीडिया उनकी श्रद्धांजलि और उनके गीतों से पट गया.
जमशेदपुर म्यूजिक सर्किल के सुभाष बोस कहते हैं-यह संगीत की दुनिया की ऐसी क्षति है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता है. कोई दूसरी लता नहीं हो सकती है. बकौल सुभाष बोस, बेहद दुख का दिन है. जबसे खबर सुना है, उनके गीत गानों में गूंज रहे हैं. बचपन में पिता का साया गुजर जाने के बाद भी पूरे परिवार का भरण-पोषण किया. अभिनय से लेकर गायन में एक अलग पहचान बनाई. अभी पिछले दिनों ही बिरजू महाराज का निधन हुआ था. उनकी याद में आज शाम को हम कदमा के कला उद्यान में एक संगीत समारोह भी करने जा रहे हैं. हम इस कार्यक्रम में आज लता जी को भावभीनी श्रद्धांजलि देंगे और जल्द ही उनकी याद में एक संगीत समारोह का आयोजन करेंगे.
बंगाल क्लब ने बुलाने की कोशिश की थी, लेकिन फिर बात नहीं बन पाई
एक समय शहर के संगीत का केन्द्र रहे बंगाल क्लब ने लता जी को जमशेदपुर में लाने की कोशिश की थी, लेकिन किसी वजह से यह कार्यक्रम अंतिम रूप नहीं ले सका. सुभाष बोस बताते हैं कि लता जी के समय के सारे मेल सिंगर-मो.रफी, मन्ना डे और किशोर कुमार यहां पर आए, लेकिन लता जी को सामने सुनने से लौहनगरी वंचित रह गई. मगर कई ऐसी संस्थाएं हैं, जो लता के जन्म दिन पर संगीत कार्यक्रम कराती रही है.
भारत रत्न से सम्मानित हैं लता मंगेशकर
28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मी लता मंगेशकर भारत की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका थीं. उनका छह दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है. लता जी ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फिल्मी और गैर-फ़िल्मी गाने गाये हैं लेकिन उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायक के रूप में रही है. अपनी बहन आशा भोंसले के साथ लता जी का फिल्मी गायन में सबसे बड़ा योगदान रहा है. लता की जादुई आवाज के भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में दीवाने हैं. लता मंगेशकर को भारत सरकार ने ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया था.




