
Ranchi: दिव्यांग बच्चों को झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा से वंचित रखने को लेकर छाया मंडल की ओर से दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में हुई. चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार को 4 सप्ताह में विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई 27 अप्रैल निर्धारित की है. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अभय प्रकाश ने पैरवी की.
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सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि प्रार्थी छाया मंडल ने अपने दिव्यांग बच्चे का एडमिशन रांची के सरकारी स्कूलों में कराने की कोशिश की थी, लेकिन उनके बच्चे का एडमिशन नहीं लिया गया. बाद में उन्हें पता चला कि राज्य के सरकारी स्कूल में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं है. जिसके बाद इनकी ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई. कहा गया है जिन माता – पिता के बच्चे दिव्यांग है उनके बच्चों को सरकार के स्कूलों में पढ़ाने अवसर मिलना चाहिए.
याचिका में कहा गया है कि शिक्षा के अधिनियम 2009 तथा राइट टू डिसेबिलिटी एक्ट 2016 के तहत सरकारी स्कूलों में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का होना आवश्यक है , लेकिन राज्य के सरकारी स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षक नहीं है. प्रार्थी की ओर से याचिका में कहा गया है की झारखंड सरकार द्वारा दिव्यांग 5 लाख बच्चों को पढ़ाने को लेकर एनजीओ को 30 से 40 लाख रुपए एनजीओ को दिया जाता है. इसके बाद भी दिव्यांग छात्र शिक्षा से वंचित है. एनजीओ द्वारा दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने में कोई रुचि नहीं दिखाई जाती है.




