
Ranchi: सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता (सीजीएल)-2023 के तहत 21 व 22 सितंबर को ली गयी परीक्षा में गड़बड़ियों की सीबीआइ जांच को लेकर दायर प्रकाश कुमार एवं अन्य की जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड हाइकोर्ट में हुई. मामले में सुनवाई जारी रही. प्रार्थियों की ओर से बुधवार को बहस पूरी हो गई. अब गुरुवार को फिर मामले की सुनवाई होगी.
प्रार्थियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि क्वेश्चन पेपर लीक हुआ है. झारखंड CGL पेपर लीक मामले के मुद्दे पर राज्य सरकार का स्टैंड जुलाई माह से लगातार बदलता रहा है. मामले में अनुसंधानकर्ता को भी बिना कोर्ट के अनुमति के बदल दिया गया. ऐसा कैसे हो सकता है कि गेस पेपर के 50% से अधिक क्वेश्चन उक्त परीक्षा में आ गए. महाधिवक्ता राजीव रंजन ने सरकार और जेएसएससी का पक्ष रखते हुए प्रार्थी के सवालों का जवाब गुरुवार को देने की बात कही. वहीं हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता बी मोहना ने कोर्ट को बताया कि क्वेश्चन के लीक होने का कोई मामला नहीं है. क्यों कोई स्टूडेंट इस मामले में सामने नहीं आया, कोचिंग इंस्टिट्यूट संचालक ही इस मामले को हवा दे रहे हैं. कॉमन तरीके से फेक प्लानिंग के माध्यम से क्वेश्चन पेपर लिक होने की बात कही जा रही है. कोर्ट ने अगले आदेश तक पूर्व में पारित अंतरिम आदेश (स्टे) को बरकरार रखा है.
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार उपस्थित थे. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी प्रकाश कुमार व अन्य की ओर से जनहित याचिका दायर की गयी है. सीजीएल परीक्षा रद्द करने तथा पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग की है. परीक्षा में पेपर लीक, पेपर का सील खुला होना, बड़ी संख्या में प्रश्नों को रिपीट करने जैसी गड़बड़ी हुई है. सीजीएल परीक्षा-2023 में 3,04,769 अभ्यर्थी शामिल हुए थे. विभिन्न विभागों में 2025 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी है.




