न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

दुमका से हेमंत सोरेन नहीं लड़ेंगे चुनाव, सुरक्षित सीट की हो रही तलाश!

2,604

Pravin Kumar

लोकसभा चुनाव के बाद विरोधी दल के नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर आशंकित नजर आ रहे हैं. यह हाल बड़े नेताओं का है. विपक्ष के नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन दुमका लोकसभा सीट से दिशोम गुरु शिबू सोरेन की हार के बाद अपनी विधानसभा सीट बदल सकते हैं. इसे लेकर अटकलों का बाजार भी गर्म है. झारखंड मुक्ति मोर्चा जहां विधानसभा चुनाव को देखते हुए मजबूती से अपनी तैयारी में लग गया है, वहीं पार्टी हेमंत सोरेन के लिए सुरक्षित सीट की भी तलाश रही है. यह तय माना जा रहा है कि इस बार वे दुमका से चुनाव नहीं लड़ेंगे. बरहेट से लड़ेंगे या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो वे दो नयी विधान सभा सीटों की तलाश में हैं.

इसे भी पढ़ें- एडवोकेट जनरल से लीगल एडवाइस लेने के बाद देवघर पुलिस करेगी प्रदीप यादव पर कार्रवाई

2014 के चुनाव में हेमंत दुमका और बरहेट से लड़े थे चुनाव

2014 के विधान सभा चुनाव में हेमंत सोरेन दो स्थानों से चुनाव में खड़े हुए थे. जिसमें दुमका विधानसभा सीट पर लुईस मरांडी से हेमंत सोरेन को शिकस्त मिली थी और वह बरहेट विधानसभा से चुनाव जीते थे. पार्टी सूत्रों के अनुसार दुमका विधानसभा सीट से हेमंत के चुनाव नहीं लड़ेंगे की बात समाने आ रही है. इसके लिए बरहेट के अतिरिक्त दो और सीटों की तलाश की जा रही है.

इसे भी पढ़ें – बढ़ेंगी हेमंत सोरेन की मुश्किलेंः सोहराय भवन मामले में सरकार ने दिया कार्रवाई का आदेश

Related Posts

100 रुपये में #IAS बनाता है #UPSC, #Jharkhand में क्लर्क बनाने के लिए वसूले जा रहे एक हजार

झारखंड में बनना है क्लर्क तो आइएएस की परीक्षा से 10 गुणा ज्यादा देनी होगी परीक्षा फीस.

भाजपा का झामुमो के गढ़ संथाल और कोल्हान पर है जोर

भाजपा और खास कर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने संथालपरगना में पार्टी की कामयाबी के लिए पिछले पांच सालों से निरंतर सक्रियता दिखायी हे. भाजपा ने विधानसभा चुनाव में उन सीटों को विशेष तौर पर फोकस किया है, जहां 2014 में उसे हार मिली थी और 2019 के लोकसभा चुनाव में वह पिछड़ गयी है. भाजपा जानती है कि झामुमो का असली गढ़ संथालपरगना और कोल्हान ही है. भाजपा ने झामुमो के सामाजिक समीकरण में सेंध लगाने की कई रणनीति को अंजाम दिया है. लोकसभा चुनाव उन क्षेत्रों के कुर्मी वोटर पर उसने खास तौर पर ध्यान दिया जो परंपरगात रूप से झामुमो के साथ रहे हैं. इसके लिए उसने झामुमो के एक विधायक को अपने पक्ष में किया और आजसू के साथ गठबंधन भी किया. विधान सभा के चुनाव को ध्यान में रखते हुए वह झामुमो के वर्चस्व वाले क्षेत्रों के सामाजिक समीकरण में भाजपा की सेंधमारी का संकेत झामुमो नेतृत्व को मिल चुका है. पार्टी सूत्रों के अनुसार हेमंत सोरेन गंभीरता से सुरक्षित विधान सभा सीट की तलाश कर रहे हैं. इसके लिए उनकी एक टीम विभिन्न विधान सभा क्षेत्रों का अध्ययन कर रही है. झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन की हार से हेमंत सारेन का आत्मविश्ववास भी डगमगाया हुआ है. राजनीतिक जानकार कहते है महागठबंधन कायम रहता है तो हेमंत को उन विपक्षी दलों के नेताओं का नेतृत्व विधान सभा चुनाव में करना है. लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी में हताशा है. पार्टी को हताशा से निकाल कर फिर से भाजपा का मुकाबला करने की महती जिम्मेवारी उन पर है.

इसे भी पढ़ें- सरायकेला मॉब लिंचिंग की घटना को लेकर हाइकोर्ट में दाखिल हुआ पीआइएल, सीबीआइ जांच की मांग

हेमंत के लिए दुमका और बरहेट विधानसभा में भाजपा का वोट शेयर है खतरे का संकेत

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उन विधानसभा क्षेत्रों में मिली बढ़त जो झामुमो के इलाके माने जाते हैं अन्य इलाकों की रणनीति का आधार बने हैं. भाजपा ने दुमका और बरहेट को खास तौर पर निशाने पर लिया है. हेमंत सोरेन इन इलाकों में भाजपा की रणनीति का विकल्प अब तक पेश नहीं कर पाये हैं. विधायक के रूप में बरहेट में उनकी छवि को ले कर भी कई तरह के सवाल हैं. झामुमो के ही कई स्थानीय नेताओं ने पार्टी से दूरी बना ली है. बरहेट में भी देखा जा रहा है कि झामुमो समर्थकों का एक तबका नाराज चल रहा है. लोकसभा में भी नाराजगी दिखी है. राजमहल लोकसभा क्षेत्र से झामुमो ने प्रभावी जीत दर्ज की है. लेकिन जिस तरह भाजपा ने अपना वोट शेयर बढ़ाया है, वह झामुमो के लिए खतरे का संकेत है. 2019 के लोकसभा चुनाव में दुमका विधानसभा में भाजपा को 78,623  वहीं झामुमो को मात्र 57,271 वोट मिले. वहीं बरहेट विधानसभा जहां से हेमंत विधायक हैं वहां भाजपा को 49,299 और झामुमो को 62,921 वोट मिले. बरहेट से झामुमो को बढ़त मिली, लेकिन 2014 में विधानसभा में मिली बढ़त से करीब सात हजार काम रही. वहीं भाजपा ने बढ़त का अंतर काम किया.

इसे भी पढ़ें – धर्मेन्द्र प्रकाश बादल ने भाजपा छोड़ झाविमो का थामा दामन

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like

you're currently offline

%d bloggers like this: