
Ranchi : नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL) रांची में आज करम महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया. इस सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक आर पाटिल, रजिस्ट्रार डॉ. जिसू केतन पटनायक, आयोजन समिति के सदस्य एवं सहायक प्रोफेसर राम चंद्र उरांव सहित अनेक गणमान्य शिक्षकों ने शिरकत की.
समारोह में छात्रा साक्षी ने करम और धरम नामक दो भाइयों की पौराणिक कथा का मनोहारी वर्णन किया. इसके उपरांत, अखरा द्वारा निर्मित करम पर्व पर आधारित एक प्रभावशाली वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा प्रस्तुत किया गया एक विशेष फैशन शो था, जिसमें झारखंड की पांच प्रमुख जनजातियों – हो, खड़िया, मुंडा, संथाली और उरांव – की विशिष्ट जीवनशैली और पारंपरिक वेशभूषा को दर्शाया गया. इस प्रदर्शन के माध्यम से छात्रों ने प्रत्येक समुदाय की विशिष्टताओं और उनके जीवन में प्रकृति के महत्व को रेखांकित किया.
समारोह में छात्रों के एक समूह ने मनमोहक करम गीत और नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक आर पाटिल ने कहा, “हमारे विश्वविद्यालय में इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं, परंतु यह करम महोत्सव विशेष महत्व रखता है. छात्रों में प्रकृति और उसके संरक्षण के प्रति जो उत्साह देखने को मिला, वह अत्यंत प्रेरणादायक है. मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम आने वाली पीढ़ियों को भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में सफल होंगे. हमारा लक्ष्य है कि अगले वर्ष करम महोत्सव को विश्वविद्यालय परिसर से बाहर, किसी आदिवासी गाँव में मनाया जाए, जिससे हम उनकी समस्याओं को समझ सकें और उनके समाधान में योगदान दे सकें.”
विश्वविद्यालय के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. जिसू केतन पटनायक ने इस शानदार आयोजन के लिए छात्रों और आयोजन समिति का हार्दिक आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “इस प्रकार के कार्यक्रम प्रकृति के महत्व को समझने और उसके संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रभावी माध्यम हैं. विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को अत्यंत सफल बनाया है.”
करम महोत्सव के इस भव्य आयोजन ने न केवल छात्रों में सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव का भाव जगाया, बल्कि प्रकृति संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला. यह कार्यक्रम NUSRL की सांस्कृतिक विविधता को संजोने और पारंपरिक मूल्यों को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया.



