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CM हेमंत लीज प्रकरण और शेल कंपनी मामले पर 19 मई को होगी सुनवाई

Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ माइनिंग लीज आवंटन और शेल कंपनी से जुड़े मामले पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई.  पहले सुनवाई शेल कंपनी को लेकर हुई, इस मामले में सरकार की तरफ से अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा. मामले को लेकर कोर्ट किसी फैसले तक नहीं पहुंच पायी. सुनवाई होने के बाद कोर्ट ने 19 मई को फिर से सुनवाई करने की बात कही. वहीं माइनिंग लीज प्रकरण मामले की सुनवाई हुई, इसमें हेमंत सोरेन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मुकुल रहतोगी पक्ष रख रहे थे. दोनों सुनवाई खत्म होने के बाद कोर्ट ने 19 मई को फिर से सुनवाई करने की बात कही है.

इडी की ओर से अधिवक्ता सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने पक्ष रखा. माइनिंग मामले की सुनवाई के दौरान रांची DC छवि रंजन भी मौजुद रहे.

झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई. देश के तीन प्रख्यात अधिवक्ताओं ने सुनवाई भाग लिया.

 

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शिवशंकर शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने यह आदेश दिया. मामले को लेकर सोमवार को ईडी ने हाइकोर्ट में सीलबंद लिफाफे सौंपा था. पिछले सुनवाई के दौरान ईडी के अधिवक्ता तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि उसने शेल कंपनियों के बारे में जो दस्तावेज जुटाए हैं, उन्हें कोर्ट में पेश करना चाहते हैं. इस पर कोर्ट ने दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में जमा करने के निर्देश दिया था. हाल के दिनों में ईडी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं. जिसे सोमवार को सीलबंद लिफाफे में हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराया गया.

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मामले को लेकर की थी कड़ी टिप्पणी

बीते शुक्रवार को माइनिंग लीज और शेल कंपनियों से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी में कौटिल्य के अर्थशास्त्र का एक वाक्यांश दोहराया. कोर्ट ने कहा कि राजा का सुख प्रजा की सुख में ही होता है. क्या हेमंत सोरेन के खदान लीज मामले में इस नीति का पालन किया गया. अदालत ने हेमंत सोरेन के वकील कपिल सिब्बल की तरफ से इसे जनप्रतिनिधित्व  अधिनियम के 9ए से अलग मामला बताने पर कड़ी टिप्पीणी की, कहा था कि मुख्यबमंत्री की बात छोड़ भी दें, तो एक विभागीय मंत्री अपने नाम पर खदान ले रहा है. उसे खान सचिव और विभाग उपकृत कर रहा है. फिर क्या, यह अपने पद का दुरुपयोग नहीं है.

शेल कंपनियों को लेकर भी दायर की गयी थी याचिका

मामले को लेकर शिव शंकर शर्मा ने जनहित याचिका दायर की थी. अधिवक्ता राजीव कुमार के माध्यम से दायर की गयी जनहित याचिका में बताया गया कि सीएम हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन की अवैध आय का निवेश उनके करीबियों द्वारा बनायी गयी कई शेल कंपनियों में किया गया है. 28 ऐसी कंपनी का ब्यौरा अदालत में पेश किया गया था, जो रवि केजरीवाल, रमेश केजरीवाल, अमित अग्रवाल, अभिषेक प्रसाद एवं अन्य लोगों के नाम पर बनायी गयी थी. याचिकाकर्ता के अनुसार इन कंपनियों के माध्यम से निवेश किया जाता है. पीआईएल में सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स से सोरेन परिवार की पूरी संपत्ति की जांच की मांग की गयी थी.

 

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