
Ranchi: रिम्स की लचर व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान मामले में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने अपने मौखिक टिप्पणी में कहा कि हर एक व्यक्ति की जान की कीमत होती है ,इसलिए रिम्स प्रशासन को लोगों की जिंदगी बचाने के लिए हर संभव उपाय करना चाहिए. लोगों के इलाज के लिए आवश्यक दवाएं, कॉटन, बैंडेज, सिरिंज जैसी आम जरूरतों की चीज को स्टॉक खत्म होने के पहले ही एडवांस में मंगा लिया जाना चाहिए ताकि इसकी किल्लत न रहे. कोर्ट ने विभिन्न दवाओं व अन्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए रिम्स प्रबंधन को शपथ पत्र दाखिल करने का भी निर्देश दिया. कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि रिम्स की ओर से सिर्फ आपूर्ति आदेश दे दिया जाता है लेकिन उक्त सामान उपलब्ध हुई या नहीं इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है. रिम्स प्रशासन देखे कि जेम्स से अगर सामान मिलते हैं तो उसे खरीद ले या अन्य जगहों से उसे खरीद कर उपलब्ध रखें. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई.
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रिम्स प्रबंधन का जवाब असंतोषजनक
मामले में रिम्स की ओर से कहा गया की एक्सरे प्लेट सहित जरूरत की गई सभी चीजों को उपलब्ध करा लिया गया है, जिस पर कोर्ट ने कहा कि एडवांस में रिम्स को चीजें मंगा लेनी चाहिए. रिम्स में एक्स रे मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीन,सीटी स्कैन मशीन आदि को हमेशा दुरुस्त रखना चाहिए. कोर्ट ने रिम्स के प्रभारी निदेशक को भी तलब किया, लेकिन किसी कारणवश वे उपस्थित नहीं हो सके. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर निर्धारित की.




