
Ranchi: कुख्यात अपराधी सुरेंद्र सिंह रौतेला उर्फ सुरेंदर बंगाली द्वारा लालपुर थाना से जुड़े मामले में मिली आजीवन कारावास की सजा में 21 साल जेल में रहने को ध्यान में रखते हुए इस मामले से रिहा करने का आग्रह करने वाली क्रिमिनल रिट की सुनवाई शुक्रवार को झारखंड हाई कोर्ट में हुई. मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 21 फरवरी निर्धारित की. कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि वर्ष 2020 में सुरेंद्र बंगाली की सजा को लेकर राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड ने उसकी सजा माफ करने संबंधी मामले को खारिज कर दिया था. वर्ष 2020 के बाद अब फरवरी 2023 चल रहा है, इस दरमियान 2 साल से ज्यादा का समय बीत गया. इस दौरान सुरेंद्र बंगाली की सजा माफी के बारे में सरकार ने कोई विचार किया गया है या नहीं. कोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल करें.
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की कोर्ट ने मामले की सुनवाई की. पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर बताया गया था इनके खिलाफ कई और केस है, जो लंबित है इसलिए इन्हें रिहा नहीं किया जा सकता है. बता दें कि लालपुर थाना कांड संख्या 31/ 1996 में हत्या से जुड़े एक मामले में सुरेंद्र बंगाली को रांची सिविल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी. वर्ष 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र बंगाली के फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदला था. इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2000 में सुरेंद्र बंगाली के फांसी की सजा को कंफर्म किया था. प्रार्थी की ओर से याचिका दाखिल कर कहा गया था कि वर्ष 1984 की एक बिहार सरकार की एक पॉलिसी है जिसे झारखंड सरकार ने अंगीकृत किया है. जिसके तहत आजीवन कारावास में जेल में 14 साल से अधिक समय बिताने के बाद अभियुक्त को रिहा करने पर कंसीडर किया जाएगा. प्रार्थी की ओर से याचिका दाखिल कर कहा गया है कि वह इस मामले में 21 साल से अधिक समय से जेल में है इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता लोकेश कुमार ने पैरवी की.
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