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मीडिया-अखबार को खरीद लिया हूं…

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T.P. Singh

NTPC त्रिवेणी के कोई अधिकारी हैं परेशान सिंह. कहते हैं कि सभी मेडिया, प्रेस, अख़बार को बड़कागांव से लेकर रांची तक ख़रीद लिया हूं. कहीं कोई कुछ नहीं छापेगा. अब इसमें सच्चाई क्या है. ये बड़कागांव के पत्रकार साथी बेहतर बता सकते हैं.

Trade Friends

ग्रामीणों की धान की फ़सल पर बुलडोज़र चलने के बाद न्यूज़ बनाने गया था. मैं वहां न्यूज़ बना रहा था तो परेशान बाबू उस लड़के से बहस करने लगे जो मुझे लेकर गया था बल्कि उसका मोबाइल भी छीनने की कोशिश की. मुझसे कहने लगे कि पहले बताना था कि पत्रकार हैं. ऑफिस में बुलाने की कोशिश भी की.

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उनकी बात भी सही प्रतीत होती है क्यूंकि इतनी बड़ी ख़बर को चुपचाप दबा दिया, निगल लिया तो क्या कहा जाये? पचास एकड़ में लहलहाती धान की फ़सल को रौंद डाला. और पचास एकड़ में दबाया जा रहा है. ग्रामीणों को इस ज़मीन का मुवावज़ा भी नहीं मिला है. चाहे यह खेत किसी का हो, अकाल सुखांड़ के वर्ष में दो महीने इंतज़ार किया जा सकता था. अनाज की क़िल्लत होगी तो क्या कोयला खाओगे. पीएम मोदीजी से कह दो आपका किसान प्रेम नाजायज़ है. हमलोग हरियाली ओर ख़ुशहाली को रोंदेंगे.

वाह रे इंसाफ़. NTPC त्रिवेणी ने सभी मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार कर मनवाधिकारों का खुला उल्लंघन किया है. मनवाधिकारों की हत्या की है, मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन हर रोज़ करते हैं, ग्रामीणों को रोज़ डराते हैं, उनके खेत, उनके पेट पर डाका रोज़ डालते हैं.

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पहली बार धान की लहलहाती फ़सल के साथ बलात्कार किया और हमारे मीडिया के साथी चुप हो गये तो उनको ग़लत बोलना भी जायज़ लगता है. हां कई साथियों ने लाख दबाव के बावजूद ख़बरें छापीं. मैं किसी पर आरोप, लांछन, दोषारोपण नहीं कर रहा हूं, लेकिन ग़रीब किसानों का दर्द देख कर पिघल गया. सहम गया, स्तब्ध हो गया, लिहाज़ा बोलना लाज़मी था.

परेशान सिंह कौन है, क्या है, क्यूं बोला यह अलग प्रश्न है. पर उसके तेवर देख कर लगा कि NTPC जैसी नवरत्न कम्पनी ने गुंडों का एक कुनबा बसा कर ग्रामीण इतिहास के एक अध्याय को मिटा डाला. वहां के लोग आह भरने ओर सिसकियां लेने के क़ाबिल भी नहीं रह गये हैं. मोदी जी ओर रघुवर दास जी के वायदे क़समें इरादे नेक नही हैं. जनता का शोषण ही सरकार की नियति बन गयी है.

(टीपी सिंह हजारीबाग के वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह टिप्पणी उनके फेसबुक वाल से ली गयी है.)

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