
Jamshedpur: घाटशिला सीट कांग्रेस और जेएमएम के शीर्ष नेताओं के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है. एक तरफ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू ने इस सीट से चुनाव लड़ने का मन बना लिया है, तो वहीं दूसरी तरफ जेएमएम जिलाध्यक्ष रामदास सोरेन भी अपनी किस्मत एक बार फिर से आजमाने को तैयार हैं.
प्रदीप बलमुचू इस सीट से तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. लेकिन 2009 में रामदास सोरेन ने बलमुचू को मात देकर सीट पर कब्जा कर लिया था.
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महागठबंधन में आ सकती है दरार
रामदास सोरेन का कहना है कि महागठबंधन के तहत भी उनको इस सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए. बीते चुनाव में रामदास सोरेन लक्ष्मण टुडू से 2000 से भी कम वोट से हारे थे.
उनको विश्वास है की इस बार जनता भरपाई करेगी. लिहाजा रामदास अपनी दावेदारी ज्यादा मजबूत समझते हैं. इसी चुनाव में प्रदीप बलमूचु ने अपनी बेटी को इस सीट से मैदान में उतारा था जो नंबर तीन पर रही थीं.
बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस और जेएमएम के बीच अगर महागठबंधन कायम रहता है तो घाटशिला सीट किसके खाते में जायेगी. फिलहाल दोनों नेता घाटशिला में जमकर पसीना बहा रहे हैं.
जिस मुड से दोनों चुनाव की तैयारी कर रहे हैं उसको देखकर लगता है की कोल्हान के दोनों नेता को मनाना पार्टी के शीर्ष नेताओ के लिए आसान नहीं होगा. संभवाना यह भी जताई जा रही है की इसके चलते कहीं महागठबंधन में दरार न पड़ जाए.
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प्रदीप बलमुचू ने खोला जनसंपर्क कार्यालय
घाटशिला से इस बार प्रदीप बलमुचू खुद चुनावी मैदान में जोर लगा रहे हैं. पिछले चुनाव में बलमुचू ने अपनी बेटी सिंड्रेला को मौका जरूर दिया था, लेकिन इस बार बलमुचू किसी और को मौका नहीं देनेवाले.
घाटशिला में उन्होंने जनसंपर्क कार्यालय का उद्घाटन किया है. गली मुहल्लों में घुमकर जनसंपर्क अभियान भी चला रहे हैं. उनका दावा है की घाटशिला की जनता बीजपी से त्रस्त है.
लक्ष्मण टुडू बीजेपी में कमजोर नेता हैं और यहां के मुद्दों को विधानसभा में रखने में असमर्थ साबित हुए हैं. प्रदीप बलमुचु का कहना है की उनको यहां की राजनीति का लंबा अनुभव है. जनता उनको मौका देगी तो वो यहां के मुद्दों को विधानसभा में मुखर हो कर रखेंगे.
महागठबंधन के तहत घाटशिला सीट अगर जेएमएम के खाते में जाती भी है तो भी प्रदीप बलमुचू का कहना है कि वो यहां से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे.




