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47.8 प्रतिशत कुपोषण वाले झारखंड में डेढ़ माह से नौनिहालों का अंडा बंद

पूरक पोषाहार के नाम पर प्रत्येक सप्ताह 6.30 लाख अंडे खरीदती थी सरकार

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Deepak

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Ranchi :  राज्य के 39 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को डेढ़ माह से पूरक पोषाहार के रूप में अंडा नहीं मिल रहा है. अप्रैल 2019 से पहले कर्नाटक की क्रिस्टी फ्राइडग्राम्स इंडस्ट्रीज की अनुषंगी इकाई किसान पोल्ट्री फार्म से सरकार अंडा खरीद रही थी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पारिवारिक सर्वेक्षण-4 में झारखंड में 47.8 प्रतिशत कुपोषण की बातें कही गयी थीं.

इसमें बच्चों के नाटे होने की बातों का भी जिक्र किया गया था. राज्य सरकार के महिला और बाल विकास विभाग की तरफ से प्रत्येक सप्ताह 6.30 लाख अंडा खरीदा जाता था. एक अंडा 5.93 रुपये की दर से खरीदा जाता था. सलाना 65 करोड़ रुपये सिर्फ अंडे की खरीद पर सरकार खर्च कर रही थी.

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देशभर में 35.6 फीसदी बच्चे ही कुपोषित

झारखंड में राष्ट्रीय औसत की तुलना में 47.8 फीसदी बच्चे कमजोर हैं. राज्य के 45.3 फीसदी बच्चे नाटे कद के हैं, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पारिवारिक सर्वेक्षण-4 की रिपोर्ट में कहा गया है कि देशभर में 35.8 फीसदी बच्चे कमजोर और नाटे कद के हैं, जिन्हें समुचित पोषाहार नहीं मिलता है. झारखंड के कोल्हान, संताल परगना और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में कुपोषण अधिक पाया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, आज भी झारखंड में पांच वर्ष तक के आयु के प्रति एक हजार बच्चों में से 44 बच्चों की मौत हो रही है. वहीं जन्म के समय प्रत्येक एक हजार बच्चों में से 54 बच्चों की मौत हो रही है. राज्यभर में 1.30 करोड़ आबादी गरीबी रेखा से नीचे रह रही है.

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2011 की जनगणना के अनुसार, 76 फीसदी गरीब लोग आज भी गांवों में रह रहे हैं. राज्य सरकार ने कुपोषण मुक्त झारखंड की परिकल्पना के आधार पर आंगनबाड़ी केंद्र में आनेवाले बच्चों को सप्ताह में तीन दिन अंडा देने का निर्णय लिया था. एक-एक केंद्र में लगभग 20-20 बच्चे प्रतिदिन आते हैं. यह सरकार का ही आंकड़ा है.

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केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत अंडा खरीदना मुनासिब नहीं : निदेशक

समाज कल्याण निदेशक मनोज कुमार का कहना है कि केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत अंडा खरीदना मुनासिब नहीं है. इस संबंध में उन्होंने विभागीय सचिव और मंत्री को भी अवगत करा दिया है. उन्होंने कहा कि अब सरकार यह निर्णय ले कि कैसे विकेंद्रीकृत व्यवस्था से अंडा खरीदा जाये.

जिलों में समेकित बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) को अंडा खरीद की राशि हस्तांतरित की जाये. उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि जिला स्तरीय खरीद पर महिला स्वंयसेवी संस्थानों को इनगेज करना चाहिए, ताकि महिला सशक्तिकरण हो सके.

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