
Ranchi: राज्य में नयी सरकार बनने के बाद पारा शिक्षकों को स्थायीकरण और वेतनमान मिलने की उम्मीद है. बीते पांच सालों को देखें तो महीनों तक मानदेय रोके जाने की समस्या पारा शिक्षकों ने झेली. वहीं दूसरी ओर अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की समस्या भी गहराती गयी.
इन सबके बावजूद पिछले छह साल से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके पारा शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिये मिलने वाली सरकारी राशि तक नहीं दी गयी. बता दें कि साल 2012 में नियमों में बदलाव किया गया. जिसमें प्रशिक्षण राशि सरकार द्वारा भुगतान न कर, शिक्षकों को खुद पैसा लगाने को कहा गया. जिसे प्रशिक्षण बाद सरकार ने लौटाने की बात कही थी.
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लेकिन राज्य में एक भी पारा शिक्षक को प्रशिक्षण के बाद राशि वापस नहीं की गयी. केंद्र सरकार की ओर से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) की ओर से साल 2011 से पारा शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेवारी दी गयी.
ऐसे में सत्र 2012-14 और सत्र 2013-15 में प्रशिक्षण लेने वाले पारा शिक्षक अपनी प्रशिक्षण राशि से वंचित हो गये. हालांकि एनआइओएस की ओर से इन्हें प्रमाण पत्र दिया गया.
हर ब्लॉक से प्रत्येक सत्र में 50 पारा शिक्षक होते हैं प्रशिक्षित
एमएचआरडी और एनसीटीई की नियमों को मानें, तो हर साल प्रत्येक ब्लॉक से 50 पारा शिक्षकों का चयन प्रशिक्षण के लिये किया जाता है. ऐसे में सत्र 2012-14 और सत्र 2013-15 में प्रशिक्षण लेने वाले पारा शिक्षकों की संख्या पंद्रह हजार के करीब होगी.
प्रशिक्षण के लिए इन शिक्षकों को सरकार की ओर से प्रशिक्षण राशि भी दी जाती. बता दें एनआइओएस की ओर से पारा शिक्षकों को दो वर्षीय कोर्स डीएलएड कराया जाता है. प्रशिक्षण में दस से 12 हजार एक पारा शिक्षक को मिलते हैं.
अप्रशिक्षित पारा शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज सिंह ने बताया कि एमएचआरडी और एनआइओएस के आपसी समन्वय में कमी के कारण कुछ पारा को प्रमाण पत्र तक निर्गत नहीं किया. जिसके कारण अब वे मानदेय से वंचित हो गये. वर्तमान में राज्य में अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की संख्या 4500 है.
2015 में बंद किया गया प्रशिक्षण
2012 में सरकार ने खुद के पैसे से प्रशिक्षण लेने का निर्देश दिया. हालांकि पैसे वापस किये जाने थे, जो हुआ नहीं. इसके बाद 2015 में राज्य सरकार की ओर से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को प्रशिक्षण देना ही बंद कर दिया गया. एनआइओएस ने भी पारा शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम बंद किया. इसी बीच एनसीटीई और एमएचआरडी की ओर से 2017 में अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को 2019 तक प्रशिक्षित होने का आदेश दिया गया.
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साल 2009 में आयी शिक्षा नीति में भी यही प्रावधान थे. इसके बाद एमएचआरडी समेत राज्य सरकारों पर भी अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की ओर से दबाव बनाया गया. फिर से एमएचआरडी ने एनआइओएस को पारा शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया. लेकिन एमएचआरडी और एनआइओएस के बीच आपसी समन्वय सही नहीं होने के कारण इस बार शिक्षकों को प्रशिक्षित होने में काफी परेशानी हुई. जिससे अभी तक शिक्षक झेल रहे हैं.
2017-19 के कोर्स को 18 महीने पहले ही खत्म किया
एमएचआरडी के आदेश के बाद एनआइओएस ने साल 2017 में सत्र 2017-19 के लिये फिर से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों का एडमिशन लिया. लेकिन सत्र 2017-19 में एनआइओएस की ओर से डीएलएड 18 महीने में ही कराया गया. जबकि कोर्स होता ही है दो साल का.
ऐसे में छह माह पहले ही एनआइओएस ने कोर्स पूरा करा लिया. इतना ही नहीं, इसी 18 महीने में प्रशिक्षकों को इंटर में मार्क्स बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया. मनोज ने बताया कि 2017 के पहले डीपीई या डीएलएड प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के चार या पांच साल का मौका दिया जाता था.
लेकिन एनआइओएस ने जून 2019 में इस सत्र का रिजल्ट जारी करने के बाद, असफल पारा शिक्षकों की पुनः परीक्षा के लिये एमएचआरडी को पत्र लिखा, जिसके बाद जनवरी 2020 में परीक्षा ली गयी. फिलहाल रिजल्ट जारी नहीं किया गया है. मनोज ने बताया कि अगर एनआइओएस ने 2019 में ही दोबारा परीक्षा ली होती और शिक्षक सफल होते, तो शायद आज उन्हें मानदेय मिल रहा होता.
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