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तो क्या सरकार और NIOS के बदलते नियमों के कारण अप्रशिक्षित रह गये 4500 पारा शिक्षक

  • एनसीटीई के नियमों को एनआइओएस ने 2017 तक नहीं माना
  • 2011 में एनआइओएस को केंद्र सरकार ने शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेवारी दी
  • नौ माह में एनआइओएस ने बदल दिया इंटर में 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता की सूचना

Chhaya

Ranchi: राज्य में नवंबर 2019 से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों का मानदेय शिक्षा विभाग ने रोक दिया है. लगभग 4,500 अप्रशिक्षित पारा शिक्षक मानदेय रोके जाने से प्रभावित हैं.राज्य में पारा शिक्षकों की नियुक्ति सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्राम शिक्षा समिति के जरिये हुई.

जब इन शिक्षकों की नियुक्ति हुई तब ये ग्राम शिक्षा समिति की सभी अर्हता को पूरा करते थे. इनकी नियुक्ति के साथ ही शिक्षा अधिकार अधिनियम आरटीई के तहत अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का प्रावधान किया गया. लेकिन राज्य और केंद्र सरकार के बार-बार बदलते नियम के कारण साल 2015 के बाद से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को प्रशिक्षण लेने में परेशानी हुई.

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सिर्फ राज्य नहीं देश भर के लगभग दस लाख अनट्रेंड पारा शिक्षक, केंद्रीय संस्थानों के बार-बार नियम बदले जाने से परेशान हैं. इसमें एमएचआरडी, एनसीटीई और एनआइओएस प्रमुख है. जिन्होंने साल 2015 के बाद से लगातार नियमों में बदलाव किया.

एनसीटीई के नियमों को एनआइओएस ने 2017 तक नहीं माना

आरटीई के अनुसार, पूर्व में इग्नू से इन शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता था. प्रशिक्षण में डीएलएड या डीपीई, जो दो वर्षीय कोर्स है कराया जाता था. साल 2011 में इसकी जिम्मेवारी नेशनल इंस्टीट्युट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) को दी गयी. इसी बीच साल 2009 में शिक्षा नीति लागू की गयी.

जिसमें साल 2019 तक सभी पारा शिक्षकों को प्रशिक्षण पूरा करने का निर्देश दिया गया. साथ ही राष्ट्रीय शिक्षक अध्यापक परिषद् (एनसीटीई) की ओर से साल 2009 में नियम बनाया गया, जिसमें प्रशिक्षण के लिये शिक्षकों को इंटर में 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य है.

इसका पालन एनआइओएस की ओर से साल 2017 तक नहीं किया गया. जबकि सत्र 2017-19 में इसे अनिवार्य कर दिया गया. प्रत्येक साल हर प्रखंड से 50-50 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता था.

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NIOSने बार-बार किया अधिसूचना में बदलाव

अगस्त 2017 में डीएलएड के लिये एनआइओएस ने एडमिशन लिया. 28 अगस्त 2017 को एनआइओएस के क्षेत्रीय निदेशक अनिल कुमार सिंह ने पत्र जारी कर सूचना दी कि स्नातक पास अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिये 12 वीं में पचास प्रतिशत अंक जरूरी नहीं है. ऐसे में जिन शिक्षकों का इंटर में पचास प्रतिशत से कम अंक है. उन्हें मार्क्स इंप्रुव के लिये फिर से नामाकंन करने की जरूरत नहीं.

इसके ठीक नौ महीने बाद एनआइओएस की ओर से पत्र निर्गत किया गया, जिसमें इंटर में पचास प्रतिशत अंक को जरूरी बताया गया. लेकिन इस अधिसूचना के साथ मार्क्स इंप्रुवमेंट के लिये कोई प्रावधान नहीं किया गया.

इसके बाद भी कुछ शिक्षकों ने इंटर में एनआइओएस में नामाकंन कराया. लेकिन एनआइओएस की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गयी और न ही कोर्स मैटेरियल उपलब्ध कराया गया. ऐसे में शिक्षक डीएलएड में अच्छे अंक होने के बावजूद, इंटर का प्रमाण पत्र नहीं मिलने से शिक्षक कार्य से वंचित हो गये.

18 महीने में कराया गया डीएलएड

2017 के पहले डीपीई या डीएलएड प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के चार या पांच साल का मौका दिया जाता था. लेकिन सत्र 2017-19 में एनआइओएस की ओर से डीएलएड 18 महीने में कराया गया. जबकि कोर्स होता ही है दो साल का. ऐसे में छह माह पहले ही एनआइओएस ने कोर्स पूरा करा लिया. इतना ही नहीं, इसी 18 महीने में प्रशिक्षकों को इंटर मे मार्क्स बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया.

केंद्रीय निदेशक ने सहयोग करने की बात की थी

एनआइओएस के केंद्रीय निदेशक सीबी शर्मा ने खुद कई बार स्वयं पोर्टल में दिशा-निर्देश दिया कि स्कूल में पढ़ाते हुए और प्रशिक्षण और इंटर में नंबर बढ़ाना मुश्किल काम है. ऐसे में उनकी ओर से सहयोग किया जायेगा. यहां तक की एनआइओएस की ओर से प्रशिक्षकों को इंटर में मार्क्स बढ़ाने के लिये पांच साल का समय दिया जाना है.

खुद एडमिट कार्ड में इस बात का जिक्र है. लेकिन एनआइओएस ने शिक्षकों को यह समय नहीं दिया. प्रशिक्षकों की ऑनलाइन परीक्षा ली जाती है. ऐसे में दो या दो से अधिक बार परीक्षा पास करने का मौका दिया जाता. खुद एनआइओएस के केंद्रीय निदेशक ने यह निर्देश दिया.

इसके बाद भी साल 2017-19 के दूसरे सत्र की इंटर परीक्षा में कोर्स कोड 506 से 510 के लिये परीक्षा का दूसरा मौका नहीं दिया गया. जिससे प्रशिक्षक असफल हुए. इसके बाद जून 2019 में एनआइओएस ने डीएलएड का रिजल्ट जारी किया गया.

इस परीक्षा में असफल प्रशिक्षकों की परीक्षा एनआइओएस ने एमएचआरडी की स्वीकृति के बाद जनवरी 2020 में ली. डीएलएड की दूसरी परीक्षा का परिणाम अब तक नहीं आया है.

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NIOSने काम पूरा नहीं किया, तो शिक्षक कैसे वंचित होंगे

इस संबध में अप्रशिक्षित शिक्षक संघ के अध्यक्ष मनोज सिंह ने कहा कि आरटीई के तहत अप्रशिक्षित शिक्षकों को 2019 तक प्रशिक्षण ले लेना था. ऐसे में एनआइओएस ने अपनी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं की, तो शिक्षकों को एमएचआरडी कार्य करने से वंचित कैसे कर सकता है.

सरकार को चाहिये की इसमें सुधार करें. मनोज ने कहा कि अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों का मामला सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि देश का है. हालांकि दिल्ली और बंगाल जैसे राज्यों में राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद मामला स्थिर है. क्योंकि शिक्षा समवर्ती सूची में शामिल है.

मनोज ने कहा कि अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को नवंबर से मानेदय नहीं मिला. जबकि चुनाव कार्य भी कराये गये. अधिकारी कहते है जबरन काम कर रहे शिक्षक. तो चुनाव कार्य नहीं लेना चाहिये. सबसे परेशानी को मानेदय की है. उन्होंने कहा कि राज्य में 2002 से 2008 तक पारा शिक्षकों की नियुक्ति की गयी. 17 सालों तक एक क्षेत्र में काम करने के बाद शिक्षक कहां जायेंगे.

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