
Jamshedpur : पूर्व सांसद सह आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहा है कि झामुमो ने अपने रांची महाधिवेशन में 67% का संयुक्त आरक्षण देने का संकल्प लिया है. जो बाबूलाल मरांडी के मुख्यमंत्रित्व काल में घोषित 73% संयुक्त आरक्षण से कम है. झारखंड निर्माण के बाद सालखन मुर्मू, बंधु तिर्की, चमरा लिंडा के नेतृत्व में आदिवासी झारखंड जनाधिकार मंच ने जोरदार स्थानीयता और आरक्षण आंदोलन चलाया था. जिसके फलस्वरूप बाबूलाल मरांडी को 32% आदिवासी, 27% ओबीसी और 14% दलितों के लिए आरक्षण की घोषणा करनी पड़ी थी. झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी पूर्व घोषित 73% आरक्षण लागू करने में क्या दिक्कत हुई ? आज की सरकार अब तक स्थानीयता नीति और रोजगार नीति बनाने में असफल और फिसड्डी साबित हो रही है. यह चुनावी वायदों के खिलाफ है. सरना धर्म कोड के मामले पर भी झामुमो की टालमटोल वाली रवैया र्भाग्यपूर्ण है. 22 दिसम्बर 1855 को संताल परगना और एसपीटी कानून बना और 22 दिसम्बर 2003 को संताली भाषा 8 वीं अनुसूची में शामिल हुआ. झारखंड सरकार को इसके परिपेक्ष्य में 22 दिसंबर को “हासा- भाषा विजय दिवस” मनाकर मातृभूमि और मातृभाषा को सम्मानित करना बनता है. सेंगेल विजय दिवस मनाने के बाद 23 दिसम्बर से ” सरना धर्म कोड सह संताली राजभाषा सगड़ ( रथ) ” साल के अंत तक जान जागरण के लिए 5 प्रदेशों में चलायेगी.
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