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गिरिडीह: सरकारी मुआवजा से असंतुष्ट किसानों ने रोका कोनार नहर तटबंध मरम्मत कार्य

Giridih: कोनार नहर के टूटे तटबंध के मरम्मत कार्य को रविवार को किसानों ने रोक दिया. किसानों का आरोप है कि सरकार ने तटबंध टूटने पर किसानों की क्षति की जो मुआवजा राशि तय की है, वो सरकारी स्तर पर उचित मुआवजा का मापदंड नहीं है.

अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में किसानों ने यह कदम उठाया. किसानों का कहना है कि तटबंध के टूटने से उनकी लाखों की फसल बबार्द हो गयी. ऐसे में जो क्षतिपूर्ति राशि सरकार की ओर से किसानों को दी जा रही है, वो काफी कम है. किसान इससे संतुष्ट नहीं है.

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इस संबध में किसानों ने कहा कि उचित मुआवजा मिलने के बाद ही टूटे तटबंध की मरम्मत कार्य शुरू की जायेगी. जानकारी हो कि, राज्य की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक कोनार नहर परियोजना है. अनुमान है कि लगभग 50 लाख की फसल इस नहर के कारण बर्बाद हुई है.

130 किसानों की फसल बर्बाद

इससे सैकड़ों एकड़ में लगी धान, मकई, मुंगफली आदि की फसले बर्बाद हुई. नहर टूटने के बाद ही डीसी राहुल कुमार सिन्हा ने क्षतिग्रस्त फसलों का मुआयना किया था. जिसके बाद समिति का गठन किया गया.

गठित समिति ने क्षतिपूर्ति का आकलन किया था. इसमें कुल 130 किसानों की फसलों के बर्बाद होने की रिपोर्ट सामने आयी थी. उसके बाद क्षतिपूर्ति के एवज में मुआवजा देने के लिए मापदंड तैयार किए गए थे.

इसी मापदंड से किसानों में नाराजगी है. क्षतिपूर्ति के एवज में बहुत कम मुआवजा राशि तय किए जाने का आरोप किसानों ने लगाया है.

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उद्घाटन के 24 घंटे बाद ही टूटा थी नहर

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 28 अगस्त को नहर का उद्घाटन किया था. लेकिन उद्घाटन के 24 घंटे के भीतर ही कोनार नहर बह गयी थी. बगोदर के कुसमरजा पंचायत के घोसको में नहर का तटबंध टूट गया था.

काम बंद करने वालों में शनिचर पंडित, मोईउदीन अंसारी, सतेन्द्र यादव, खजमुदीन अंसारी, बिशुन पंडित, महेंद्र राउत, सीमा कुमारी, सुमा देवी, बिंदु देवी, शांति देवी, कांति देवी, तालो पंडित, योगेदर साव, किशुन रविदास, संजय रविदास, राजू पंडित आदि है.

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